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स्वतंत्रता दिवस पर भाषण, छात्रों, शिक्षकों और प्रिंसिपल के लिए हिंदी में – १५ अगस्त २०१९

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण, छात्रों, शिक्षकों और प्रिंसिपल के लिए हिंदी में - १५ अगस्त २०१८

सबसे पहले, मैं अपने सभी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देना चाहता हूं। आप इस पेज पर हैं इसका मतलब एक तो आप स्कूल / कॉलेज शिक्षक, प्रिंसिपल या एक छात्र हैं जो स्वतंत्रता दिवस भाषण या निबंध ढून्ढ रहें है। मुझे यह बताने में बहोत खुशी हो रही है की आप सही जगह पर हैं। यहां इस आर्टिकल में, हम आपको चार १५ अगस्त के भाषण दे रहे हैं, दो शिक्षक, प्रिंसिपल के लिए और दो स्टूंडेंट्स ले लिए|

पहले दो स्वतंत्रता दिवस भाषण औपचारिक और बड़े हैं, जिनका उपयोग स्कूल या कॉलेज शिक्षक, प्रोफेसर या प्रिंसिपल आदि द्वारा किया जा सकता है। इस भाषण में, हमने स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता सेनानियों, उनके बलिदान, वर्तमान पर्यावरण और युवाओं की राय के बारे में बात की है। लेकिन एक शिक्षक या प्रिंसिपल के रूप में, आपको अपने भाषण में अपने स्कूल या कॉलेज के सम्बंधित कुछ चीजें जोड़ने की आवश्यकता हो सकती है| जैसे मुख्य अतिथि का स्वागत, आपके स्कूल के इतिहास या गतिविधियों आदि के संदर्भ आदि|

स्वतंत्रता दिवस पर तीसरा और चौथा भाषण स्कूल या कॉलेज के छात्रों के लिए लिखा गया है, यह पहले दो की तुलना में थोड़ा सरल है। यदि आप स्कूल या कॉलेज के छात्र हैं तो सीधे वह सेक्शन देख सकतें है। स्वतंत्रता दिवस भाषण जो हमने छात्रों के लिए लिखा है वह ३१५ शब्दों का है। कभी कभी भाषण के लम्बाई/ शब्दों की सीमा हो सकती है, आप दिए गए स्पीच से आवश्यक लंबाई जैसे १००, १५०, २५०, ३०० का भाषण निकल सकते है। ४०० से ५०० शब्दों के लंबे भाषण के लिए, आप पहले दो भाषणों से सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। कक्षा १,२,३,४ आदि के छोटे बच्चों के लिए, हमने स्वतंत्रता दिवस पर एक अलग १० लाइनों लघु निबंध लिखा है।

कोई भी देश परफेक्ट नहीं होता, उसे बनाना पड़ता है … (रंग दे बसंती, फिल्म से डायलॉग)

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण स्कूल शिक्षकों और प्रिंसिपल के लिए हिंदी में

वैसे तो यह भाषण शिक्षकों और प्रिंसिपल्स के लिए लिखा गया है, लेकिन हमने इस भाषण में भावनाओं को जोड़ने की कोशिश की है (दुर्भाग्यवश, ऐसे भाषणों में इसकी कमी होती है)। एक शिक्षक या प्रिंसिपल के रूप में, आपके पास छात्रों को प्रभावित करने की शक्ति है, आपके पास उन्हें सही मार्गदर्शन करने की इच्छा भी होती है। एक ठेठ सूखे भाषण के बजाय; आप उन्हें भावनात्मक स्वतंत्रता दिवस भाषण के साथ प्रेरित कर सकते है। आशा है आपका हमारा यह प्रयास पसंद आएगा? आप के विचार आप हमें कमेंट सेक्शन में बता सकतें है।

प्रिय दोस्तों, सुप्रभात,
आज हम अपने भारत के ७२ वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए यहां इकट्ठे हुए हैं। मैं आप सबका तहे दिल से स्वागत करता हूँ|

(यहां आप अपना मुख्य अतिथि स्वागत भाषण या ओपनिंग वेलकम नोट आदि जोड़ें)

आज हमें आझाद हुए सात दशकों से अधिक समय हुआ है और फिर भी, हम दुनिया के साथ बने रहने में सफल नहीं हैं। वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भूल जाओ, आज भी लाखों भारतीय रात को आधे पेट सोते हैं। हम आज भी अपराध, बलात्कार, भ्रष्टाचार, गरीबी और कैसी कहीं समस्याओंसे झुलस रहें है। क्या इसी भारत के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने शहादत दी? क्या यह उनके सपनोंका भारत है? क्या यह वहीँ देश है जिसके लिए सरहद पर जवान अपनी जान देनेके लिए तैयार है?

बेशक नहीं, है ना? तो फिर दोषी कौन है? राजनेता, नीतियां, व्यवस्था? हां, वे इस ज़िम्मेदार हैं, लेकिन क्या वे अकेले लोग हैं जिन्हें हमें दोषी ठहराया जाना चाहिए? क्या हमने अपनी जिम्मेदारियां पूरी की है? आरोप और निंदा करना बहुत आसान होता है। दूसरों पर उंगली उठाने के बदले क्या हम अपनी जिम्मेदारियोंपे बल नहीं दे सकते?

हम अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए लड़ते हैं, और हमें लढना भी चाहिए। हमें किसी भी राजनीतिक दल, नीतियों को अपने मूल अधिकारोंको नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। लेकिन हम में से कितने लोग जानते हैं कि हमारे कुछ संवैधानिक कर्तव्य भी हैं। एक भारतीय नागरिक के रूप में, हमारे पास कुछ नैतिक जिम्मेदारियां भी हैं। तकनीकी रूप से, हम उनका पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि हमें नहीं करना चाहिए।

क्या हम अपने देश को साफ नहीं रख सकतें हैं? क्या आप उम्मीद करते हैं कि रोज एक सरकारी कर्मचारी आपके रसोईघर में आ जाए और सूखे और गीले कचरे को अलग करे? हां, सरकार की आधारभूत संरचना बनाने की जिम्मेदारी हैं। एक उदाहरण लेते है, सरकार सड़कों और पुलों का निर्माण करती है, वह यातायात को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक सिग्नल्स बिठाती है। वे आपको आपकी सुरक्षा के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने के लिए कहते हैं। हम में से कितने लोग मन से इन नियमों का पालन करते हैं? हम भीड़ के बारे में निरंतर शिकायत करते रहते हैं, लेकिन हम कभी यह नहीं सोचते कि हम भी समस्या का हिस्सा हैं। अगर हम नहीं नहीं बदलते हैं तो देश कैसे बदल जाएगा, हम से ही तो देश बनता है। मुझे इस स्थिति पर गांधीजी के उद्धरण (Quote) याद हैं, यह हमारी समस्याओं का एकमात्र समाधान है।

You must be the change you want to see in the world.

ऐसे हजारों सवाल हैं जिनपे हमें चिंतन करना चाहिए। एक राष्ट्र का अस्तित्व उसके नागरिकों से बनता है, हम देश का एक अभिन्न हिस्सा हैं। सरकार की जिम्मेदारियां है और वह उनको पूरी करनी ही होगी। लेकिन साथ ही, हम में से हर एक को, प्रत्येक संस्था, निजी या सार्वजनिक को अपना काम करना होगा। वैज्ञानिकोंने नई तकनीके इजात करने की जरूरत है, शोधकर्ताओंने विश्व स्तरीय शोध करने की जरूरत है, अस्पतालों पर लोगों जीवन बचानेकी जिम्मेदारी, पुलिस को लोगों की रक्षा करनी चाहिए और अपराध को रोकना चाहिए।

एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में, हमारे कंधे पर भी हमारी ज़िम्मेदारी है। निरक्षरता और गरीबी साथ साथ चलते है। आज भी लाखों बच्चे हैं जिन्हें माध्यमिक विद्यालय जाने का मौका नहीं मिलता है। सरकार शिक्षा पर बहुत पैसा खर्च करती है। आज आप सब यहाँ तक पहुचें हैं, यह एक सौभग्य की बात है। शिक्षक, प्रोफेसर, प्रशासनिक अधिकारियों को यह महसूस करने की आवश्यकता है कि वे राष्ट्र निर्माण का भी हिस्सा हैं। हम सभी को अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की जरूरत है, हम सभी को अपनी भूमिका अदा करनी होगी । अभी आप इस स्कूल / कॉलेज / विश्वविद्यालय में हैं, यहां आपकी सीखने की ज़िम्मेदारी है और हम आपको सर्वश्रेष्ठ शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं देने के लिए भी बाध्य हैं।

अगर हम यह कर पातें है तो हम एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हम परिवर्तन के प्रतिनिधि हो सकते हैं, हम सुधार के प्रक्रिया के उत्प्रेरक (catalyst) हो सकते हैं। यहां हमें राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका मिली है, हम छात्रों और शिक्षकों को इस चुनौती को स्वीकार लेना चाहिए और राष्ट्र को सशक्त बनाना चाहिए। आप सब प्रतिभाशाली हैं, आप सभी में वह जज्बा, वह जोश है| किसी मसीहा की प्रतीक्षा मत करो, आपको अपने हाथों और मस्तिष्क के साथ अपने और देश के भविष्य को बनाने की जरूरत है।

साथ में हम इसे कर सकते हैं, आइए आज इस ७२ वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रतिज्ञा करें कि हम अपने भारत को स्वच्छ, शिक्षित, अपराध और भ्रष्टाचार मुक्त कर देंगे। इस तरह हम वास्तव में अपने स्वतंत्रता सेनानी के सपने का भारत बना सकते हैं।

जय हिंद, जय भारत… धन्यवाद।

स्कूल शिक्षकों और प्रिंसिपल के लिए स्वतंत्रता दिवस (१५ अगस्त) पर भाषण #२

सुप्रभात, देवियों, सज्जनों और छात्रों,
सबसे पहले, मैं आपको अपने भारत के ७२वें स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ दिन पर शुभकामनाएं देता हूं।

इसरो के अंतरिक्ष अनुसंधान विभाग के प्रमुख श्रीमती रामास्वामी मैं आपका हमारे मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत करतां हूँ। हम सभी आपके भाषण से प्रेरित हैं, आपने आपके कार्य का अनुभव साझा किया है; मुझे यकीन है कि हमारे बहुत से छात्र हमारे महान राष्ट्र की सेवा करने पर विचार करेंगे।

इन दिनों स्वतंत्रता शब्द में मायने बदल रहें है। भारत में बहुत से शिक्षित लोग देर रात की पार्टियों, अल्कोहल की खपत की पात्रता और ऐसे चीज़ों की आजादी के बारे में शिकायत करते रहते हैं। मैं इन लोगों से कहना चाहूंगा, एक गहरी सांस लें और अपनी आंखें बंद करें और कल्पना करें कि शहीद भगत सिंह ने अपने चेहरे पर मुस्कान लिए जब फांसीके फंदे को चूमा था तब क्या सोचा होगा। चलो २ सेकंड का विराम लेते है और यह समझने की कोशिश करते है, किस स्वतंत्रता के लिए वे ख़ुशी ख़ुशी मर मिटे? लेट नाईट पार्टी की या अल्कोहल की?

सिर्फ सात दशकों पहले भारतीयों को अपने तरीकेसे जीने की आज़ादी नहीं थी, वे ताउम्र किसी सम्राट या विदेशी शक्तियों के ग़ुलाम थे। वे कभी नहीं जानते थे कि स्वतंत्रता कैसे होती है लेकिन उन्हें पता था कि यह नहीं होतीं है कैसा लगता है। उन दिनों उन्हें खुद को व्यक्त करने की आजादी नहीं थी, उन्हें अपनी ज़िंदगी अपने सलीखेंसे जीने की इजाजत नहीं थी।

जब हम भारत में होते हैं तो हम इस स्वतंत्रता के मायने नहीं समझ पातें। हम सड़कों पर गंदगी डाल रहे हैं, हम अफ़सरोंको को रिश्वत देते हैं, हम केवल अपने स्वयं के स्वार्थी लाभ के बारे में सोचते हैं। क्या होता यदि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ऐसा सोचा होता? मैं कभी-कभी सुनता हूं कि कुछ लोग कहते हैं, अगर १९४७ में अंग्रेज नहीं गए होते तो अब तक हम एक विकसित देश बन गये होते थे। दुर्भाग्यवश, यह संभव था कि वे बेहतर बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का निर्माण कर सकते थे; लेकिन आजादी के बारे में क्या। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी मिलने के बाद आज भी हम एक देश के रूप में संघर्ष कर रहे हैं| स्वतंत्रता मिलनेके से कुछ ही वर्षों में भ्रष्टाचार सरकारी प्रणाली में रेंगने लगा, और आजकल तो इसने सब हदें पार करदीं है|

मैं विदेश में गया हूं, मैं वहां कुछ सालों तक रहां हूँ। एक चीज जिसे मैंने वहां महसूस किया, वे आपको हिंदू, मुस्लिम या सिख के रूप में नहीं पहचानते हैं, वे दलितों और ब्राह्मणों से अलग-अलग व्यवहार नहीं करते हैं, वे हमें भारतीयों के रूप में देखते हैं। वे यह भी सोचते हैं कि हम भारतीय, पाकिस्तानी, श्रीलंकाई, बांग्लादेसी एक ही है, क्योंकि हम समान दिखते हैं, हमारे समान तौरतरीके हैं। लेकिन जब हम यहां अपने देश में आतें है तो हम विभाजित हो जाते हैं जब आप देश के बाहर हों, तो आपको अचानक भारतीय पहचान पर गर्व महसूस होता है, आपको राष्ट्र के लिए गर्व महसूस होता है। अगर कोई भारत की प्रशंसा करता है या व्यक्तिगत भारतीय की उपलब्धि की सराहना करात है तो आपको भी गर्व महसूस होता है। तो जब हम भारत वापस आते हैं तो क्या होता है? हम एक-दूसरे से ईर्ष्या क्यों करते हैं, हम अभी भी जाति और पंथ पर क्यों लड़ते हैं?

इस सब के पीछे समग्र कारण है कि हमने अपनी स्वतंत्रता को हलके में लिया है, या फिर कभी इसे समझने की कोशिश ही नहीं की है। हम सभी स्वतंत्र भारत में पैदा हुए हैं, हम नहीं जानते कि गुलाम होना क्या होता है|

हमारे लिए हजारों स्वतंत्रता सेनानियों अपनी जान देदी, हम उनमें से केवल कुछ दर्जनों को जानते हैं। हम उन हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी नहीं जानते जो हमारे लिए मर मिटे, जिन्होंने इस स्वतंत्रता के लिए असहनीय दर्द का सामना किया।

आइये, जरा ठहर जाएँ और सोचे की हमें क्या करना होगा| अगर हम युवा शक्ति को एक साथ लातें है और उन्हें सही दिशा दे पातें है तो हम अपने सपनोंका भारत अपने हातों से बना सकते है|

जय हिंद, जय भारत….

स्वतंत्रता दिवस पर हिंदी भाषण, स्कूल के छात्रों के लिए – १५ अगस्त २०१९

सभी को सुप्रभात,
आज १५ अगस्त है, यह दिन भारतीय लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। आज हम अपना ७२वा स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। १५ अगस्त १९४७ को हमें ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली। उन्होंने २०० से अधिक वर्षों से भारत पर शासन किया, जिसके दौरान उन्होंने हमें विभाजित किया, जुल्म किया और हमारे ऊपर शासन किया।

मंगल पांडे, लोकमान्य तिलक, भगत सिंह, महात्मा गांधी से लेकर नेताजी बोस और हजारों स्वतंत्रता सेनानियोंके बलिदान से भारत की स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। जब हमने स्वतंत्रता प्राप्त की थी इनमेसे ज्यादातर महानुभाव जीवित नहीं थे|

हम अब ७२ साल से एक स्वतंत्र देश हैं, हमारे पास अपनी सरकार है और हमें यहां जीने की आज़ादी है। लेकिन फिर भी, हम गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, बाल तस्करी, बलात्कार, दंगों, जाति भेदभाव, लिंग असमानता और बहोत सारी समस्योंसे उलझे हुए है|

७२ साल पहले हमारे पास बहाना था कि विदेशी शक्तियां शासन करती हैं तो हम कुछ भी नहीं कर सकें| स्वतंत्रता मिलने के बाद में हमने धीमी वृद्धि के लिए सरकार और राजनीति को दोषी ठहराया और हम आज भी उन्हें दोषी ठहराते रहे।

लेकिन हम लोग कभी अंदर नहीं देखते हैं। हम भूल गए कि इसमें हमारी भी एक भूमिका है। हम छात्रों को यथासंभव ज्ञान हासिल करना चाहिए और एक महान करियर बनाना चाहिए। अगर हम सब ऐसा करते हैं जो यह देश की मदद करेगा। अगर हमने कदाचार (malpractices) और भ्रष्टाचार में शामिल न होने का फैसला किया है तो भारत में बड़ी बड़ी समस्याएं ऐसेही गायब हो जाएंगी।

हम, युवाओंके संघटन में महान शक्ति है। पुरानी पीढ़ी को भूल जाओ, चलिए ड्राइवर सीट पर बैठते हैं और इस यात्रा को शुरू करते हैं। हम सब मिलकर इसे कर सकते हैं, केवल हम लोग इसे कर सकते हैं। अगर हमारी पीढ़ी अब इस अवसर को अनदेखा करती है, तो हम इस नुकसान को फिर से ठीक नहीं कर पाएंगे। तो, दोस्तों स्वयं केंद्रित मनस्तिथि से बाहर आते हैं और सभी के बारे में सोचते हैं, सभी के लिए कुछ करते हैं …

मेरे साथ कहो, .., भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, … जय हिंद।

सूचना: अगर आपको यह स्वतंत्रता दिवस पर दिए हुए सैंपल भाषण पसंद आते है तो, कृपया हमें अच्छी रेटिंग दे | धन्यवाद, फिरसे एक बार कहता हूँ, आपको ७२ वे स्वतंत्रता दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं, जय हिन्द, जय भारत.

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