निबंध लेख हिंदी

नया साल निबंध / नव वर्ष पर एस्से – हिंदी में

Essay on New Year Eve Celebration for School Students

सबसे पहले, आप सबको नये साल की ढेर साड़ी शुभकामनाएं| हम आशा करते हैं की यह नया साल आपके और आपके परिवार के सब सपने पूरे करें| तो चलिए अब काम की बात करते है| आप यह लेख पढ़ रहें है मतलब आप नव वर्ष या नया साल विषय पर निबंध ढून्ढ रहे हो| तो आप सहीं जगह आयें हो, यहाँ हमने आप को एक सैंपल एस्से दिया है जिसमे हम नव वर्ष दिवस के इतिहास पर थोड़ी रोशनी डाली है, और हम यह भी देखेंगे की यह क्यों और कैसे मनाया जाता है|

यह लेख हमने निबंध के स्वरुप में लिखा है, पर यहां दी गयी जानकारी आप भाषण, पैराग्राफ और आर्टिकल राइटिंग के लिए भी इस्तेमाल कर सकते है| हमने नये साले के भाषण भी लिखें है, आप वह भी पढ़ सकते है|

नया साल | नये साल पर निबंध

हर देश हर साल अलग अलग वक्त पर नये साल का जश्न मानते है| अलग अलग जगह पर साल का पहला दिन कभी स्थानिक पंचांग, त्यौहार, खगोलीय समय, ऐतिहासिक घटना, महत्वपूर्ण व्यक्तित्व आदि चीज़ों पे निर्भर होता है| आज दुनिया का लगभग हर राष्ट्र ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल करता है, जिसका पहला दिन १ जनवरी होता है| पर चीन, भारत, इस्राएल और ऐसे बहुत सारे देशोंका या प्राँतोंका अपना पंचांग या कैलेंडर है| अकेले भारत में कही प्रकार के पंचांग है; जैसे, महाराष्ट्र के लोग मार्च में नया साल मानते है, और उसे गुड़ी-पाड़वा कहा जाता है| यह एक बड़ा त्यौहार होता है, तो हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से आता है| तेलुगु और कन्नड़ बोलने वाले लोग अपने नये साल को “उगड़ी” बोलते है, और वह मार्च या अप्रैल महिनेमे आ सकता है| १४ अप्रैल को पंजाबी भाई अपना नया साल “बैसाखी” बड़े चाव से मनाते है|

ई.पू. ४५ में पहली बार नये साल का जश्न मनाया गया था| पर उस वक्त यह के एक पंचांग (कैलेंडर) समायोजन (एडजस्टमेंट) था|

जूलियस सीज़र नामक रोमन तानाशाह ने रोमन कैलेंडर में सुधार करने का फैसला किया,जो ७वीं शताब्दी ई.पू. से इस्तेमाल में था| यह कैलेंडर चंद्र चक्र पर आधारित था, यह मौसम के साथ अक्सर चरण से बाहर हो जाता था और उसे बार बार ठीक करना पड़ता था। सिक्सिगेन्स एक अलेक्ज़ांड्रियी खगोल विज्ञानी थे, उनोन्हे सौर चक्रों का उपयोग करने की सलाह दी| उस समय मिस्र (इजिप्त) के लोग सौर चक्र पर आधारित कैलेंडर का इस्तेमाल करते थे, जो रोमन कैलेंडर से सटीक था। उस सुझाव पर अमल करके, ई.पू. साल ४५ में ६७ दिन जोड़ें गए और ई.पू. साल ४६ चालू हुआ| पहले, नव वर्ष मार्च में आता था, इस समायोजन के बाद पहिली बार साल का पहिला दिन १ जनवरी को आया| उसी वक्त यह फैसला लिया गया की हर ४ साल बाद फरवरी में एक दिन जोड़ा जाएगा|

साल १५७० में रोमन चर्च को इस कैलेंडर में फिरसे कमियां दिखी| कैलेंडर में फिरसे बदल किये गए, उस कैलेंडर “ग्रेगोरियन कैलेंडर” कहते है जो आज भी प्रचलित है| तब से १ जनवरी को नए साल के सटीक आगमन के रूप में मनाया जाता है।

कुछ लोग फसल का स्वागत करने के लिए नए साल का जश्न मनाते हैं, तो कुछ लोग घटना या व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने के लिए नए साल का जश्न मनाते हैं। विभिन्न देशों के समाजों में नए साल का जश्न मनाने के कई कारण होतें हैं। दिन या नाम अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन नया साल एक ही कारण के लिये मनाया जाता है। नया साल, नयी उम्मीद का, नये सपनोंका, नये अवसर का प्रतिक होता है । पिछले साल से सिख ले के आगे पढ़ने का प्रतिक होता नया साल|

कई शहर लाखोंका खर्चा करके रातको १२ बजे आतशबाज़ी करवाते है, बहुत सारे लोग ऐसे भव्य नज़ारोंका आनंद लेते है| कुछ साल पहले, दुबई के बुर्ज खलीफा पर (जो दुनिया की सबसे बड़ी इमारत है,) एक भव्य आतशबाजीका प्रदर्शन हुआ था, लाखों दिरहैम (दुबई की करेंसी) खर्च हुए थे| ऐसेही प्रदर्शन,कार्यक्रम दुनियाके हर बड़े शहर में हर साल होते है| बड़े बड़े राजनेता जनता को अपना नये साल का सन्देश देते है|

यह सब ठीक है, पर आजकल हम इसका मतलब भूल चुके है, अब नये साल की शाम बस एक पार्टी मात्र हो गयी है| लगभग हर कंपनी,ऑफिस, फ्रेंड्स और फॅमिली में नये साल की पार्टी, बैश, इवेंट होता है| जहां लोग आते है, अच्छा वक्त बिताते है, खाना पीना होता है फिर अगले इन वही घिसी पीटी ज़िन्दगी|

व्यवसायोंके लिये यह एक बहुत बड़ा सीजन होता है, वे दिवाली, क्रिसमस, न्यू ईयर जैसे मौकों पे ज्यादा से ज्यादा सेल करवाना चाहते है| इसलिए वे भावुक विद्यापन चलाते है, कीमते बढ़ाकर फिर भारी छूट दी जाती है| और ग्राहक इस सब में फास जाता है|

नये साल पर संकल्प (रेसोलुशन) करना और २ हफ्ते में भूल जाना, अब यह तो मज़ाक बन चूका है| में मानता हूँ की हर किसीको अपने तरह व्यवसाय करने का, पार्टी करने का हक़ हे मगर हमे नये साल का सन्देश नहीं भूलना नहीं चाहिए| नया साल नये मौके का, नये सपनोंका प्रतीक होता है, हमें इससे सिख लेनी चाहिए|


अगर आपको यह “नया साल / नव वर्ष” विषय पर लिखा हुआ सैंपल निबंध पसंद आया तो कमेंट करना न भूले|

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