भाषण हिंदी

पी.एम. नरेंद्र मोदीजी का नए साल का भाषण – मन की बात पूरा भाषण हिंदी में

Narendra Modi New Year Speech 31 Dec 2017 English hindi

सबसे पहले, आपको नये साल की ढेर सारी शुभकामनाएं, आपको और आपके परिवार को यह नया साल खुशियोंसे और तरक्की से भरदे|

चलो चर्चा करते हैं की इस साल के भाषण में किन किन चीजोंका समावेश होने की संभावना है| पिछले साल का भाषण नोटेबंदी के आस पास घूमता रहा| इस साल भी नोटेबंदी जैसा बड़ा फैसला जारी किया गया, वह है जीएसटी| तो हमें लगता है की इस साल के भाषण में ज्यादातर जीएसटी के बारें में बातें होंगी|

आप को पता ही होगा की हालही में ही बीजेपी गुजरात में चुनाव जीती| गुजरात एक व्यवसाय प्रधान राज्य है जहां लाखों छोटे,बड़े उद्योग है| ऐसा माना जा रहां था की उद्योगक, उनपे निर्भर लोग, उनके कर्मचारी और मजदूर जीएसटी का सर्थन नहीं करेंगे| पर फिर भी बीजेपी को गुजरात में जित मिली, इससे प्रतीत होता है की गुजरात जैसे व्यवसाय प्रधान राज्य ने जीएसटी को स्वीकार लिया है| पीएम मोदी अपने नये साल के भाषण में इस उपलब्धि का जरूर फायदा उठाएंगे|

हमें यह लगता है की इस भाषण में मोदीजी ज्यादातर उद्योजक, व्यापरी श्रोताओंको सम्बोधित करेंगे| जीएसटी जैसे बड़े फैसले में और प्रतिवर्तन में साथ देने के लिए उनका शुक्रियादा करेंगे| हमे लगता है की, की भाषण में व्यावसायिक समुदायको नये साल के अवसर पर कुछ न कुछ उपहार जरूर मिलेगा, जैसे टैक्स रेट में कटौती या फिर, टैक्स में राहत देने वाले उपाय, योजनाएं आदि. आम आदमी से जुडी स्कीम्स, योजना की भी घोषणा की जा सकती है|

Note: ऐसा लग रहा है की हमारा अनालिसिस गलत था, पीएम में मन के बात में अलग अलग विषयों पर बात की.  🙂

पी.एम. नरेंद्र मोदी का नए साल का भाषण – मन की बात

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार, मन की बात का इस वर्ष का यह आखरी कार्यक्रम है, और संयोग देखिये की आज वर्ष २०१७ का भी आखरी दिन है, इस पूरे वर्ष बहोत सारी बातें हमने और आपने शेयर की| मन की बात के लिए आपके ढेर सारे पत्र, कमैंट्स, विचारोंका यह आदान प्रदान मेरे लिए तो हमेशा एक नयी ऊर्जा लेके आता है| कुछ घंटो बाद वर्ष बदल जाएगा पर हमारी बातों का यह सिलसिला आगे भी इसी तरह जारी रहेगा| आने वाले वर्ष में हम और नयी नयीं बातें करेंगे, नए अनुभव शेयर करेंगे, आप सबको २०१८ की अनेक अनेक शुभ-कामनायें|

अभी पिछले दिनों, २५ दिसम्बर को विश्वभर में क्रिसमस का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। भारत में भी लोगों ने काफी उत्साह से इस त्योहार को मनाया। क्रिसमस के अवसर पर हम सब ईसा मसीह की महान शिक्षाओं को याद करते हैं और ईसा मसीह ने सबसे ज़्यादा जिस बात पर बल दिया था, वह था – “सेवा-भाव”। सेवा की भावना का सार हम बाइबल में भी देखते हैं।

The Son of Man has come, not to be served,
But to serve,
And to give his life, as blessing
To all humankind.

यह दिखाता है कि सेवा का माहात्म्य क्या है! विश्व की कोई भी जाति होगी, धर्म होगा, परम्परा होगी, रंग होंगे लेकिन सेवाभाव, ये मानवीय मूल्यों की एक अनमोल पहचान के रूप में है। हमारे देश में निष्काम कर्म की बात होती है, यानी ऐसी सेवा जिसमें कोई अपेक्षा न हो। हमारे यहाँ तो कहा गया है ‘सेवा परमो धर्म’। ‘जीव-सेवा ही शिव-सेवा’ और गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस तो कहते थे, शिव-भाव से जीव-सेवा करें यानी पूरे विश्व में ये सारे समान मानवीय मूल्य हैं। आइये , हम महापुरुषों का स्मरण करते हुए, पवित्र दिवसों की याद करते हुए, हमारी इस महान मूल्य परम्परा को नयी चेतना दें, नयी ऊर्जा दें और ख़ुद भी उसे जीने का प्रयास करें।

मेरे प्यारे देशवासियो, यह वर्ष गुरुगोविन्द सिंह जी का ३५०वां प्रकाश पर्व का भी वर्ष था। गुरुगोविन्द सिंह जी का साहस और त्याग से भरा असाधारण जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। गुरुगोविन्द सिंह जी ने महान जीवन मूल्यों का उपदेश दिया और उन्हीं मूल्यों के आधार पर उन्होंने अपना जीवन जिया भी। एक गुरु, कवि, दार्शनिक, महान योद्धा, गुरुगोविन्द सिंह जी ने इन सभी भूमिकाओं में लोगों को प्रेरित करने का काम किया। उन्होंने उत्पीड़न और अन्याय के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। लोगों को जाति और धर्म के बंधनों को तोड़ने की शिक्षा दी। इन प्रयासों में उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत कुछ गवाना भी पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी भी द्वेष की भावना को जगह नहीं दी। जीवन के हर-पल में प्रेम, त्याग और शांति का सन्देश,कितनी महान विशेषताओं से भरा हुआ उनका व्यक्तित्व था| ये मेरे लिए सौभाग्य की बात रही की मैं इस वर्ष की शुरुआत में गुरुगोविन्द सिंह जी ३५०वीं जयंती के अवसर पर पटनासाहिब में आयोजित प्रकाशोत्सव में शामिल हुआ। आइए, हम सब संकल्प लें और गुरुगोविन्द सिंह जी की महान शिक्षा और उनके प्रेरणादायी जीवन से, सीख लेते हुए जीवन को ढालने का प्रयास करें।

एक जनवरी, २०१८ यानी कल, मेरी दृष्टि से कल का दिन एक स्पेशल दिवस है। आपको भी आश्चर्य होता होगा, नया वर्ष आता रहता है, एक जनवरी भी हर वर्ष आती है, लेकिन जब, स्पेशल बात करता हूँ तो सचमुच में मैं कहता हूँ कि स्पेशल है! जो लोग वर्ष २००० या उसके बाद जन्मे हैं यानी २१वीं सदी में जिन्होंने जन्म लिया है वे एक जनवरी, २०१८ से एलिजिबल वोटर्स बनना शुरू हो जायेंगे। भारतीय लोकतंत्र, २१वीं सदी के वोटर्स का, ‘न्यू इंडिया वोटर्स’ का स्वागत करता है। मैं, हमारे इन युवाओं को बधाई देता हूँ और सभी से आग्रह करता हूँ कि आप स्वयं को वोटर के रूप में रजिस्टर करें। पूरा हिन्दुस्तान आपको २१ वीं सदी के वोटर के रूप में स्वागत करने के लिए लालायित है। २१वीं सदी के वोटर के नाते आप भी गौरव अनुभव करते होंगे। आपका वोट ‘न्यू इंडिया’ का आधार बनेगा। वोट की शक्ति, लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति है। लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ‘वोट’ सबसे प्रभावी साधन है। आप केवल मत देने के अधिकारी नहीं बन रहे हैं। आप २१वीं सदी का भारत कैसा हो? २१वीं सदी के भारत के आपके सपने क्या हों? आप भी तो भारत की २१वीं सदी के निर्माता बन सकते हैं और इसकी शुरुआत एक जनवरी से विशेष रूप से हो रही है। और आज अपनी इस ‘मन की बात’ में, मैं १८ से २५ वर्ष के ऊर्जा और संकल्प से भरे हमारे यशस्वी युवाओं से बात करना चाहता हूँ। मैं इन्हें ‘न्यू इंडिया युथ’ मानता हूँ। न्यू इंडिया युथ का मतलब होता है, उमंग, उत्साह और ऊर्जा। मेरा विश्वास है कि हमारे इन ऊर्जावान युवाओं के कौशल और ताक़त से ही हमारा ‘न्यू इंडिया’ का सपना सच होगा।

जब हम नए भारत की बात करते हैं तो, नया भारत जो ये जातिवाद, साम्प्रदायवाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार के ज़हर से मुक्त हो, गन्दगी और ग़रीबी से मुक्त हो। न्यू इंडिया, जहाँ सभी के लिए समान अवसर हों, जहाँ सभी की आशा आकांक्षाएँ पूरी हों। नया भारत, जहां शांति, एकता और सद्भावना ही हमारा गाइडिंग फ़ोर्स हो। मेरा यह ‘न्यू इंडिया युथ’ आगे आए और मंथन करे कि कैसे बनेगा न्यू इंडिया। वो अपने लिए भी एक मार्ग तय करे, जिनसे वो जुड़ा हुआ है उनको भी जोड़े और कारवाँ बढ़ता चले। आप भी आगे बढें , देश भी आगे बढ़े। अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो मुझे एक विचार आया कि क्या हम भारत के हर ज़िले में एक मॉक पार्लियामेंट आयोजित कर सकते हैं ? जहाँ ये १८ से २५ वर्ष के युवा, मिल-बैठ करके न्यू इंडिया पर मंथन करें, रास्ते खोजें, योजनाएँ बनाएँ ? कैसे हम हमारे संकल्पों को २०२२ से पहले सिद्ध करेंगें ? कैसे हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था? महात्मा गाँधी ने आज़ादी के आंदोलन को जन-आन्दोलन बना दिया था। मेरे नौजवान साथियो, समय की माँग है कि हम भी २१वीं सदी के भव्य-दिव्य भारत के लिए एक जन आंदोलन खड़ा करें। विकास का जन आंदोलन । प्रगति का जन आंदोलन । सामर्थ्यवान-शक्तिशाली भारत का जन आंदोलन । मैं चाहता हूँ कि १५ अगस्त के आस-पास दिल्ली में एक मॉक पार्लियामेंट का आयोजन हो जहाँ प्रत्येक ज़िले से चुना गया एक युवा, इस विषय पर चर्चा करे कि कैसे अगले पाँच सालों में एक न्यू इंडिया का निर्माण किया जा सकता है ? संकल्प से सिद्धि कैसे प्राप्त की जा सकती है ? आज युवाओं के लिए ढ़ेर सारे नये अवसर पैदा हुए हैं। स्किल डेवलपमेंट से लेकर के इनोवेशन और एन्त्रेप्रेंयूर्शिप में हमारे युवा आगे आ रहे हैं और सफल हो रहे हैं। मैं चाहूँगा कि इन सारे अवसरों की योजनाओं की जानकारी इस ‘न्यू इंडिया युथ’ को एक जगह कैसे मिले और इस बारे में कोई एक ऐसी व्यवस्था खड़ी की जाए ताकि १८ वर्ष का होते ही, उसे इस दुनिया के बारे में, इन सारी चीज़ों के बारे में सहज रूप से जानकारी प्राप्त हो और वह आवश्यक लाभ भी ले सके।

मेरे प्यारे देशवासियो, पिछली ‘मन की बात’ में मैंने आपसे पॉसिटिविटी के महत्व के बारे में बात की थी। मुझे संस्कृत का एक श्लोक याद आ रहा है-
उत्साहो बलवानार्य, नास्त्युत्साहात्परं बलम्।
सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम्।।

इसका मतलब होता है, उत्साह से भरा एक व्यक्ति अत्यन्त बलशाली होता है क्योंकि उत्साह से बढ़ कर कुछ नहीं होता। पॉसिटिविटी और उत्साह से भरे व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं। अंग्रेज़ी में भी लोग कहते हैं – ‘पेसिमिसम लीडस् टू वीकनेस, ऑप्टिमीसम टू पॉवर’। मैंने पिछली मन की बात में देशवासियों से अपील की थी कि वर्ष २०१७ के अपने पॉजिटिव मोमेंट्स शेयर करें और २०१८ का स्वागत एक पॉजिटिव अट्मॉस्फियर में करें। मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि भारी संख्या में लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म, मायगोव और नरेन्द्रमोदी ऍप पर बहुत ही पॉजिटिव रिस्पांस दिया, अपने अनुभव शेयर किये। पॉजिटिव इंडिया हैशटैग (#) के साथ लाखों ट्वीट्स किये गए जिसकी पहुँच करीब करीब डेढ़ सौ करोड़ से भी अधिक लोगों तक पहुँची। एक तरह से पाजिटिविटी का जो संचार, भारत से आरंभ हुआ वह विश्व भर में फ़ैला। जो ट्वीट्स और रिस्पांस आये वे सचमुच में इंस्पायरिंग थे। एक सुखद अनुभव था। कुछ देशवासियों ने इस वर्ष के उन घटनाक्रमों को साझा किया जिनका उनके मन पर विशेष प्रभाव पड़ा, सकारात्मक प्रभाव पड़ा। कुछ लोगों ने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों को भी शेयर किया।

साउंड बाईट #
– मेरा नाम मीनू भाटिया है। मैं मयूर विहार, पॉकेट-वन, फेज़ वन, दिल्ली में रहती हूँ। मेरी बेटी एम.बी.ए. करना चाहती थी। जिसके लिए मुझे बैंक से लोन चाहिए था जो मुझे बड़ी आसानी से मिल गया और मेरी बेटी की पढ़ाई चालू रही।

– मेरा नाम ज्योति राजेंद्र वाडे है। मैं बोडल से बात कर रही हूँ। हमने एक रुपया महीने का कटता वो बीमा था, ये मेरे पति ने करवाया हुआ था। और उनका एक्सीडेंट में निधन हो गया था। उस समय हमारी क्या हालत हुई, हमको ही पता। सरकार की ये मदद से हमको बहुत लाभ हुआ और में थोड़ी संभली उससे

– मेरा नाम संतोष जाधव है। हमारे गाँव से, भिन्नर गाँव से २०१७ से नेशनल हाईवे गया है। उसकी वजह से हमारी सड़कें वो बहुत अच्छे हो गये और बिज़नेस भी बढ़ने वाला है।

– मेरा नाम दीपांशु आहूजा, मोहल्ला सादतगंज, ज़िला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। दो घटनाएँ हैं जो हमारे भारतीय सैनिकों के द्वारा – एक तो पाकिस्तान में उनके द्वारा की गयी सर्जिकल स्ट्राइक जिससे कि आतंकवाद के लॉन्चिंग पैड्स थे, उनको नेस्तनाबूद कर दिया गया और साथ-ही-साथ हमारे भारतीय सैनिकों का डोकलाम में जो पराक्रम देखने को मिला वो अतुलनीय है।

– मेरा नाम सतीश बेवानी है। हमारे इलाके में पानी की समस्या थी बिलकुल पिछले ४० साल से हम आर्मी के पाइप -लाइन पर निर्भर हुआ करते थे। अब अलग से ये पाइप लाइन हुई है इंडिपेंडेंट ..तो ये सब बड़ी उपलब्धि है हमारी २०१७ में।

ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने-अपने स्तर पर ऐसे कार्य कर रहे हैं जिनसे कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। वास्तव में, यही तो ‘न्यू इंडिया’ है जिसका हम सब मिल कर निर्माण कर रहे हैं। आइए, इन्हीं छोटी-छोटी खुशियों के साथ हम नव-वर्ष में प्रवेश करें, नव-वर्ष की शुरूआत करें और ‘पॉजिटिव इंडिया’ से ‘प्रोग्रेसिव इंडिया’ की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएँ। जब हम सब पाजिटिविटी की बात करते हैं तो मुझे भी एक बात शेयर करने का मन करता है।

हाल ही में मुझे कश्मीर के प्रशासनिक सेवा के टॉपर अंजुम बशीर खान खट्टक की प्रेरणादायी कहानी के बारे में पता चला। उन्होंने आतंकवाद और घृणा के दंश से बाहर निकल कर कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस की परीक्षा में टॉप किया है। आप ये जानकर के हैरान रह जाएंगे कि १९९० में आतंकवादियों ने उनके पैतृकघर को जला दिया था। वहाँ आतंकवाद और हिंसा इतनी अधिक थी कि उनके परिवार को अपनी पैतृक ज़मीन को छोड़ के बाहर निकलना पड़ा। एक छोटे बच्चे के लिए उसके चारों ओर इतनी हिंसा का वातावरण, दिल में अंधकारात्मक और कड़वाहट पैदा करने के लिए काफ़ी था, पर अंजुम ने ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कभी आशा नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने लिए एक अलग रास्ता चुना – जनता की सेवा का रास्ता। वो विपरीत हालात से उभर कर बाहर आए और सफलता की अपनी कहानी ख़ुद लिखी। आज वो सिर्फ जम्मू और कश्मीर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। अंजुम ने साबित कर दिया है कि हालात कितने ही ख़राब क्यों न हों, सकारात्मक कार्यों के द्वारा निराशा के बादलों को भी ध्वस्त किया जा सकता है।

अभी पिछले हफ़्ते ही मुझे जम्मू-कश्मीर की कुछ बेटियों से मिलने का अवसर मिला। उनमें जो जज़्बा था, जो उत्साह था, जो सपने थे और जब मैं उनसे सुन रहा था, वो जीवन में कैसे कैसे क्षेत्र में प्रगति करना चाहती हैं, और वो कितनी आशा भरी ज़िन्दगी वाले लोग थे| उनसे मैंने बातें की, कहीं निराशा का नामोनिशान नहीं था – उत्साह था, उमंग था, ऊर्जा थी, सपने थे, संकल्प थे। उन बेटियों से, जितना समय मैंने बिताया, मुझे भी प्रेरणा मिली और ये ही तो देश की ताकत हैं , ये ही तो मेरे युवा हैं, ये ही तो मेरे देश का भविष्य हैं।

मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे देश के ही नहीं, जब भी कभी विश्व के प्रसिद्ध धार्मिक-स्थलों की चर्चा होती है तो केरल के सबरीमाला मंदिर की बात होनी बहुत स्वाभाविक है। विश्व-प्रसिद्ध इस मंदिर में, भगवान अय्यप्पा स्वामी का आशीर्वाद लेने के लिए हर वर्ष करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहा आते हैं। जहा इतनी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हों, जिस स्थान का इतना बड़ा माहात्म्य हो, वहां स्वच्छता बनाये रखना कितनी बड़ी चुनौती हो सकती है? और विशेषकर उस जगह पर, जो पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित हो। लेकिन इस समस्या को भी संस्कार में कैसे बदला जा सकता है, समस्या में से उबरने का रास्ता कैसे खोजा जा सकता है और जन भागीदारी में इतनी क्या ताक़त होती है, ये अपने आप में सबरीमाला मंदिर एक उदाहरण के तौर पर है। पी.विजयन नाम के एक पुलिस अफ़सर ने ‘पुण्यम पुन्कवाणम’ प्रोग्राम शुरू किया और उस प्रोग्राम के तहत, स्वच्छता के लिए जागरूकता का एक स्वैच्छिक अभियान शुरू किया। और एक ऐसी परम्परा बना दी कि जो भी यात्री आते हैं, उनकी यात्रा तब तक पूरी नहीं होती जब तक कि वो स्वच्छता के कार्यक्रम में कोई न कोई शारीरिक श्रम न करते हों। इस अभियान में न कोई बड़ा होता है, न कोई छोटा होता है। हर यात्री, भगवान की पूजा का ही भाग समझ करके कुछ न कुछ समय स्वच्छता के लिए करता है, काम करता है, गंदगी हटाने के लिए काम करता है। हर सुबह यहां सफाई का दृश्य बड़ा ही अद्भुत होता है और सारे तीर्थयात्री इसमें जुट जाते हैं। कितनी बड़ी सेलिब्रिटी क्यों न हो, कितना ही धनी व्यक्ति क्यों न हो, कितना ही बड़ा अफ़सर क्यों न हो, हर कोई एक सामान्य-यात्री के तौर पर इस पुण्यम पुन्कवाणम कार्यक्रम का हिस्सा बन जाते हैं, सफाई को करके ही आगे बढ़ते हैं। हम देशवासियों के लिए ऐसे कई उदाहरण हैं। सबरीमाला में इतना आगे बढ़ा हुआ ये स्वच्छता अभियान और उसमें पुण्यम पुन्कवाणम ये हर यात्री के यात्रा का हिस्सा बन जाता है। वहां कठोर व्रत के साथ स्वच्छता का कठोर संकल्प भी साथ साथ चलता है।

मेरे प्यारे देशवासियो, २ अक्तूबर २०१४ पूज्य बापू की जन्म जयन्ती पर हम सब ने संकल्प किया है कि पूज्य बापू का जो अधूरा काम है यानी कि ‘स्वच्छ-भारत’, ‘गन्दगी से मुक्त-भारत’। पूज्य बापू जीवन-भर इस काम के लिए जूझते रहे, कोशिश भी करते रहे। और हम सब ने तय किया कि जब पूज्य बापू की १५०वीं जयंती हो तो उन्हें हम उनके सपनों का भारत, ‘स्वच्छ भारत’, देने की दिशा में कुछ न कुछ करें। स्वच्छता की दिशा में देशभर में व्यापक स्तर पर प्रयास हो रहा है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जन भागीदारी से भी परिवर्तन नज़र आने लगा है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर की उपलब्धियों का आकलन करने के लिए आगामी ४ जनवरी से १० मार्च २०१८ के बीच दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे ‘स्वच्छ सर्वेक्षण २०१८’ किया जाएगा। ये सर्वे, चार हज़ार से भी अधिक शहरों में लगभग चालीस करोड़ आबादी में किया जाएगा। इस सर्वे में जिन तथ्यों का आकलन किया जाएगा उनमें हैं, शहरों में खुले में शौच से मुक्ति, कूड़े का कलेक्शन, कूड़े को उठा कर ले जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था, वैज्ञानिक तरीक़े से कूड़े की प्रोसेसिंग, बिहेवियरल चेंज के लिए किए जा रहे प्रयास, कैपेसिटी बिल्डिंग और स्वच्छता के लिए किये गए इनोवेटिव प्रयास और इस काम के लिए जन भागीदारी। इस सर्वे के दौरान, अलग-अलग दल जा करके शहरों का इंस्पेक्शन करेंगे। नागरिकों से बात करके उनकी प्रतिक्रिया लेंगे। स्वच्छता ऍप के उपयोग का तथा विभिन्न प्रकार के सेवा-स्थलों में सुधार का अनॅलिसिस करेंगे। इसमें यह भी देखा जाएगा कि क्या ऐसी सारी व्यवस्था शहरों के द्वारा बनायी गई हैं जिनसे शहर की स्वच्छता एक जन-जन का स्वभाव बने, शहर का स्वभाव बन जाए। स्वच्छता, सिर्फ़ सरकार करे ऐसा नहीं। हर नागरिक एवं नागरिक संगठनों की भी बहुत बड़ी ज़िम्मेवारी है। और मेरी हर नागरिक से अपील है कि वे, आने वाले दिनों में जो स्वच्छता-सर्वे होने वाला है उसमें बढ़-चढ़ करके भाग लें। और आपका शहर पीछे न रह जाए, आपका गली मोहल्ला पीछे न रह जाए, इसका बीड़ा उठाएं। मुझे पूरा विश्वास है कि घर से सूखा कूड़ा और गीला कूड़ा, अलग अलग करके नीले और हरे डस्टबिन का उपयोग, अब तो आपकी आदत बन ही गई होगी। कूड़े के लिए रीडूस, री-यूज़ और री-साइकिल का सिद्धांत बहुत क़ारगर होता है। जब शहरों की रैंकिंग इस सर्वे के आधार पर की जाएगी, अगर आपका शहर एक लाख से अधिक आबादी का है तो पूरे देश की रैंकिंग में, और एक लाख से कम आबादी का है तो क्षेत्रीय रैंकिंग में ऊँचे से ऊँचा स्थान प्राप्त करे, ये आपका सपना होना चाहिए, आपका प्रयास होना चाहिए। ४ जनवरी से १० मार्च २०१८, इस बीच होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में, स्वच्छता के इस हेअल्थी कम्पटीशन में आप कहीं पिछड़ न जायें, ये हर नगर में एक सार्वजनिक चर्चा का विषय बनना चाहिए। और आप सब का सपना होना चाहिए, ‘हमारा शहर, हमारा प्रयास’, ‘हमारी प्रगति, देश की प्रगति’। आइए, इस संकल्प के साथ हम सब फिर से एक बार पूज्य बापू का स्मरण करते हुए स्वच्छ भारत का संकल्प लेते हुए पुरुषार्थ की पराकाष्ठा करें।

मेरे प्यारे देशवासियो, कुछ बातें ऐसी होती हैं जो दिखने में बहुत छोटी लगती हैं लेकिन एक समाज के रूप में हमारी पहचान पर दूर दूर तक प्रभाव डालती रहती हैं। आज मन की बात के इस कार्यक्रम के माध्यम से मैं आपके साथ ऐसी एक बात शेयर करना चाहता हूँ। हमारी जानकारी में एक बात आयी कि यदि कोई मुस्लिम महिला, हज यात्रा के लिए जाना चाहती है तो वह ‘महरम’ या अपने मेल गार्डियन के बिना नहीं जा सकती है। जब मैंने इसके बारे में पहली बार सुना तो मैंने सोचा कि ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसे नियम किसने बनाए होंगें? ये डिस्क्रिमिनेशन क्यों? और मैं जब उसकी गहराई में गया तो मैं हैरान हो गया, आजादी के सत्तर साल के बाद भी ये रेस्ट्रिक्शन लगाने वाले हम ही लोग थे। दशकों से मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा था लेकिन कोई चर्चा ही नहीं थी। यहाँ तक कि कई इस्लामिक देशों में भी यह नियम नहीं है। लेकिन भारत में मुस्लिम महिलाओं को यह अधिकार प्राप्त नहीं था। और मुझे खुशी है कि हमारी सरकार ने इस पर ध्यान दिया। हमारी मिनिस्ट्री ऑफ़ माइनॉरिटी अफेयर्स ने आवश्यक कदम भी उठाए और ये सत्तर साल से चली आ रही परंपरा को नष्ट कर के इस रेस्ट्रिक्शन को हमने हटा दिया। आज मुस्लिम महिलाएँ, ‘महरम’ के बिना हज के लिए जा सकती हैं और मुझे खुशी है कि इस बार लगभग तेरह सौ मुस्लिम महिलाएँ ‘महरम’ के बिना हज जाने के लिए अप्लाई कर चुकी हैं और देश के अलग-अलग भागों से- केरल से ले करके उत्तर तक महिलाओं ने बढ़ चढ़ करके हज यात्रा करने की इच्छा ज़ाहिर की है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को मैंने सुझाव दिया है कि वो यह सुनिश्चित करें कि ऐसी सभी महिलाओं को हज जाने की अनुमति मिले जो अकेले अप्लाई कर रही हैं। आमतौर पर हज यात्रियों के लिए लाटरी सिस्टम है लेकिन मैं चाहूँगा कि अकेली महिलाओं को इस लाटरी सिस्टम से बाहर रखा जाए और उनको स्पेशल केटेगरी में अवसर दिया जाए। मैं पूरे विश्वास से कहता हूँ और ये मेरी दृढ़ मान्यता है कि भारत की विकास यात्रा, हमारी नारी शक्ति के बल पर, उनकी प्रतिभा के भरोसे आगे बढ़ी है और आगे बढ़ती रहेगी। हमारा निरंतर प्रयास होना चाहिए कि हमारी महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर समान अधिकार मिले, समान अवसर मिले ताकि वे भी प्रगति के मार्ग पर एक साथ आगे बढ़ सकें।

मेरे प्यारे देशवासियो, २६ जनवरी हमारे लिए एक ऐतिहासिक पर्व है। लेकिन इस वर्ष २६ जनवरी २०१८ का दिन, विशेष रूप से याद रखा जाएगा। इस वर्ष गणतंत्र-दिवस समारोह के लिए सभी दस आसियान देशों के नेता मुख्य अतिथि के रूप में भारत आएँगे। गणतंत्र दिवस पर इस बार एक नहीं बल्कि दस मुख्य अतिथि होंगे। ऐसा भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है। २०१७,आसियान के देश और भारत,दोनों के लिए ख़ास रहा है। आसियान ने २०१७ में अपने ५० वर्ष पूरे किए और २०१७ में ही आसियान के साथ भारत की साझेदारी के २५ वर्ष भी पूरे हुए हैं। २६ जनवरी को विश्व के १० देशों के इन महान नेताओं का एक साथ शरीक़ होना हम सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है।

प्यारे देशवासियो, ये त्योहारों का सीजन है। वैसे तो हमारा देश एक प्रकार से त्योहारों का देश है। शायद ही कोई दिवस ऐसा होगा जिसके नाम कोई त्योहार न लिखा गया हो। अभी हम सभी ने क्रिसमस मनाया है और आगे नया वर्ष आने वाला है। आने वाला नव वर्ष आप सभी के लिए ढ़ेरों खुशियाँ, सुख और समृद्धि ले करके आए। हम सब नए जोश, नए उत्साह, नए उमंग और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ें, देश को भी आगे बढाएँ। जनवरी का महीना सूर्य के उत्तरायण होने का काल है और इसी महीने में मकरसंक्रांति मनायी जाती है। यह प्रकृति से जुड़ा पर्व है। वैसे तो हमारा हर पर्व किसी न किसी रूप में प्रकृति से जुड़ा हुआ है लेकिन विविधताओं से भरी हमारी संस्कृति में, प्रकृति की इस अद्भुत घटना को अलग अलग रूप में मनाने की प्रथा भी है। पंजाब और उत्तर भारत में लोहड़ी का आनंद होता है तो यू.पी., बिहार में खिचड़ी और तिल संक्रांति की प्रतीक्षा रहती है। राजस्थान में संक्रांत कहें, असम में माघ-बिहू या तमिलनाडु में पोंगल, ये सभी त्योहार अपने आप में विशेष हैं और इनका अपना अपना महत्व है। यह सभी त्योहार प्राय: १३ से १७ जनवरी के बीच में मनाए जाते हैं। इन सभी त्योहारों के नाम अलग अलग, लेकिन इनका मूल तत्व एक ही है, प्रकृति और कृषि से जुड़ाव।

सभी देशवासियो को इन त्योहारों की बहुत बहुत शुभकामनाएं हैं। एक बार फिर से आप सभी को नव वर्ष २०१८ की ढ़ेरों शुभकामनाएं। बहुत बहुत धन्यवाद प्यारे देशवासियो। अब २०१८ में फिर से बात करेंगे। धन्यवाद।

Reference: https://www.narendramodi.in/mann-ki-baat

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Sueniel

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He is also CEO and Co-Founder of TeenAtHeart.