निबंध भाषण हिंदी

Essay on My First Day in School in Hindi, Speech, Paragraph | स्कूल में मेरा पहला दिन पर हिंदी निबंध भाषण परिच्छेद

Essay on My First Day in School in Hindi, Speech, Paragraph

The first experience of everything is always full of excitement, nervousness and happiness at the same time. And your first day at the new schools is no exception to that. We experience many new things on the first day at new school. So in this article, we are giving an essay on my first day at school in Hindi language. This article will help you to write the best essay on my first day in school in Hindi language and will help you to experience your thoughts better. So let’s start.

स्कूल में मेरा पहला दिन पर हिंदी निबंध भाषण परिच्छेद | Essay on My First Day in School in Hindi, Speech, Paragraph

स्कूल में मेरा पहला दिन

जीवन में अनेक पड़ाव आते हैं, जिनके साथ व्यक्ति के जीवन की अच्छी और बुरी यादें जुड़ी होती हैं। ऐसा ही एक पड़ाव सबके जीवन में आता है, जब वो स्कूल में होता है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ था। आप सोच सकते हैं की स्कूल तो सब जाते हैं, उसमें विशेष बात क्या है। मेरे जीवन में स्कूल की यादें विशेष हैं, उसका कारण है, की मैंने एक नहीं दो देशों में अपनी पढ़ाई पूरी करी है। जब मैं छटी कक्षा में था, तब मेरे पिता का तबादला अमेरिका हो गया था। इस कारण मेरे प्राथमिक स्कूल की पढ़ाई भारत में करी और उससे आगे की पढ़ाई अमेरिका में करी थी। अमेरिका में बिताया स्कूल में मेरा पहला दिन आज भी एक सुनहरी याद के रूप में मेरे मस्तिष्क में सुरक्शित है। इसी याद को एक संक्षिप्त निबंध के रूप में लिखने का प्रयत्न कर रहा हूँ।

भारत की याद

हर सामान्य बच्चे की भांति मैंने अपना विध्यार्थी जीवन भारत के एक प्रतिष्ठित स्कूल में किया था। इस स्कूल में सारी पढ़ाई अँग्रेजी भाषा में होती थी। लेकिन हिन्दी विषय की पढ़ाई, हिन्दी भाषा में ही होती थी। हिन्दी भाषा में मुझे सबसे कठिन कार्य निबंध लेखन का लगता था। कक्षा 4 और 5 की पढ़ाई मैंने भारत में रहते हुए ही पूरी करी थी। कक्षा छह में आने से पूर्व ही एक ही स्कूल में पूरी पढ़ाई करने का स्वप्न अधूरा रह गया। एक दिन अचानक पता लगा, की मेरे पापा का तबादला अमेरिका में हो गया है। नए देश में जाने की खुशी इतनी अधिक थी, की आगे आने वाली समस्याओं की ओर ध्यान ही नहीं गया।

अमेरिका में स्कूल में मेरा पहला दिन

नए देश में आने के बाद मम्मी-पापा ने एक अच्छे से स्कूल में प्रवेश दिलवा दिया। नया स्कूल हमारे घर से थोड़ी ही दूर पर था। मम्मी ने खुश होते हुए बताया की इस स्कूल में जाने के लिए हमें स्कूल बस आएगी। यह बस हमें घर से लेकर जाएगी और छुट्टी होने के बाद घर ही छोड़कर जाएगी। भारत में स्कूल जाने के लिए हम पापा की कार में अकेले ही जाते और आते थे। लेकिन यहाँ सभी फ्रेंड्स के साथ बस में जाना और आना होगा, यह सोचकर रात को नींद भी नहीं आई। अभी स्कूल जाने में चार दिन बाकी थे। यह चार दिन बस के बारे में सोचते हुए बहुत अच्छा लग रहा था।

स्कूल-बस का पहला दिन

जिस दिन स्कूल जाना था, उस दिन मम्मी को हमें सुबह उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। जल्दी-जल्दी उठकर अपनी नयी यूनिफ़ोर्म पहन कर तैयार हो गया। पापा ने बताया था, की सुबह आठ बजे हमारी स्कूल बस मुझे लेने आएगी। मैं आधा घंटा पहले ही तैयार हो कर स्कूल बस का इंतज़ार करने लगा। जैसे ही सड़क पर सामने से स्कूल बस आती दिखाई दी, खुशी और उत्साह में भरकर मैं बस की ओर भागने लगा। मन में जल्द से जल्द अपने नए स्कूल में पहुँचने के उत्साह के साथ ही नए दोस्त बनाने की मन में खुशी भी थी।

बस में सहायक नें मुझे चढ्ने में मदद करी। बस में आने के बाद देखा की केवल मैं ही भारतीय बच्चा था। यह देखकर अचानक मन में थोड़ी दुविधा जागी। लेकिन जल्द ही नए स्कूल का ध्यान आते ही फिर से मन में खुशी आ गई।

स्कूल का पहला दिन: स्कूल गेट से क्लास तक

स्कूल बस के स्कूल-कंपाउंड में पहुँचने पर अपने अन्य साथियों के साथ मैं भी बस से उतर गया। अब मेरे सामने नया स्कूल एक भव्य इमारत के रूप में खड़ा था। मन में खुशी, उत्साह और थोड़ा-थोड़ा डर के मिले-जुले भाव आ रहे थे। एक बार समझ नहीं आया की मुझे कहाँ जाना है और मेरी क्लास कहाँ होगी। तभी सामने से एक महिला अध्यापिका आतीं दिखाईं दीं। उनसे स्वयं कुछ पूछने का साहस नहीं हुआ, लेकिन शायद वो मेरे मन की दुविधा समझ चुकीं थीं। बहुत नरमाई और प्यार से उन्होनें मेरा नाम और क्लास के बारे में पूछा। उनके प्यार भरे बर्ताव से मेरे मन का डर काफी कम हो गया और मैंने अपनी क्लास और सेक्शन के बारे में उन्हें बता दिया। ममतामयी माँ की तरह वो मेरी उंगली पकड़ कर मेरी क्लास तक मुझे ले गई। उनके इस व्यवहार से मेरा नयी जगह पर होने वाला डर थोड़ा कम हुआ और मैं अब अपनी नयी क्लास्स के अंदर पहुँच चुका था।

स्कूल का पहला दिन: क्लास की दुविधा

मेरी नई क्लास बहुत सुंदर बनी थी। एक बहुत बड़ा कमरा,जिसकी दीवारें सफ़ेद रंग की थीं। इन दीवारों पर  चारों ओर बहुत सुंदर चित्रों से सजे तरह-तरह के चार्ट लगे हुए थे। यह सभी चार्ट हमारी पढ़ाई से संबन्धित अलग-अलग विषयों के आधार पर बने हुए थे। मुझे इस क्लास में लगे डैकस और उनके रखे जाने का तरीका बहुत पसंद आया। यह सारे डैक्स इस प्रकार के बने थे, जिनपर एक ही बच्चा बैठ सकता था। इस प्रकार अमेरिका के स्कूल में मुझे अपना डैक्स मिला, जिससे मेरे मन का डर और भी कम हो गया था। मैं चुपचाप पीछे के एक खाली डैक्स पर जा कर बैठ गया।

स्कूल का पहला दिन: नए दोस्त

डैक्स पर बैठने के बाद मैंने अपने चारों ओर अच्छी तरह से देखा। मेरी दायीं और बाईं ओर जो बच्चे बैठे थे, उन्होनें मुस्कुरा कर मेरी ओर मित्रता का हाथ बढ़ाया। मैंने भी मुसकुराते हुए उनका हाथ थाम लिया और “फ्रेंड्स” कहते हुए हम सबने आपस में दोस्ती कर ली थी। मेरे नए दोस्तों का नाम डेविड, जॉर्ज, जूलिया और रॉबिन था। अब हम सभी आपस में बातें कर रहे थे और मेरे मन का डर अब बिलकुल समाप्त हो गया था।

स्कूल का पहला दिन: नए अध्यापक

कुछ समय बाद हमारी क्लास में हमारे नए टीचर ने प्रवेश किया। उन्होनें मुसकुराते हुए अपना परिचय दिया। उनका नाम विलियम था और वो हमें लगभग सभी विषय पढ़ाने वाले थे। उन्होनें बताया की हमें सारी पढ़ाई इसी कक्षा में बैठ कर करनी होगी। लेकिन लाइब्रेरी, संगीत और खेल के लिए हमें उन्हीं जगहों पर जाना होगा, जहां इन विषयों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। मुझे यह सब भारत के स्कूल जैसा ही लगा। तभी मिस्टर विलियम ने एक प्रोजेक्टर ऑन कर दिया जिसके द्वारा हम एक फिल्म देखने लगे। इसमें हमारे स्कूल के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी।

स्कूल का पहला दिन

इस फिल्म से मुझे पता लगा की हमारा स्कूल बहुत बड़ा है और इसमें चार मंज़िलें हैं। इसमें खेल के दो मैदान हैं, जहां फुटबॉल और बेसबॉल जैसे खेल खेले जा सकते हैं। इसके अलावा एक बहुत बड़ा स्विमिंग पूल, बड़ी सी लाइब्रेरी, औडिटोरियम और म्यूज़िक रूम भी थे। यह सब देखकर बहुत अच्छा लगा था। इसके बाद मिस्टर विलियम ने पढ़ाई शुरू करवा दी। तभी उन्होनें एक बात बताई। मिस्टर विलियम ने मुझे अपने पास बुलाकर, सारी क्लास से मेरा परिचय करवाया और मैं भारत से आया हूँ, यह भी बताया। यह सुनकर क्लास के सभी बच्चों ने खुश होते हुए तालियाँ बजाईं और मेरा स्वागत किया। तभी मिस्टर विलियम ने मुझे बताया की मैं भारतीय हूँ, और मुझे अपने शेष विषयों के साथ हिन्दी भी पढ़नी होगी। मेरे साथ कुछ और बच्चे भी थे, जिन्हें हिन्दी पढ़नी थी, लेकिन वो भारतीय नहीं थे।

हिन्दी की क्लास

जब मुझे पता लगा की मुझे अपने विषयों के साथ हिन्दी भी पढ़नी होगी, तो मुझे थोड़ी परेशानी हुई। लेकिन अपने दोस्तों को अपने साथ देखकर अच्छा भी लगा। कुछ देर बार एक लंबी घंटी बाजी, जिससे हमारी रीसेस होने का पता चला। उस समय हम सभी अपनी क्लास से निकलकर बाहर मैदान में आ गए। दोस्तों के साथ खेलते हुए समय का पता नहीं चला और हमारी रीसेस खत्म होने की घंटी बज गई। हमारे क्लास में वापस पहुँचने पर मिस्टर विलियम ने हमें हिन्दी की क्लास के लिए जाने के लिए कहा। हमारी हिन्दी की क्लास, हमारी क्लास के साथ ही बने एक दूसरे कमरे में थी। वहाँ पहुँचकर ऐसा लगा जैसे हम भारत वापस पहुँच गए हैं। चारों ओर भारत देश से जुड़ी जानकारी हिन्दी भाषा में लिखे निबंध और चित्रों के माध्यम से दिखाई गई थी। यह सब देख कर बहुत अच्छा लगा।

हम सब बच्चों के क्लास में आने के कुछ देर बाद ही हमारे हिन्दी के टीचर भी वहाँ आ गए। उन्होनें अपना परिचय मिस्टर स्मिथ के रूप में करवाया। मिस्टर स्मिथ ने फिर हम सबका परिचय लिया जिसमें हम सबने अपना पूरा नाम बताया। मिस्टर स्मिथ ने इसके बाद सबका तालियों से स्वागत किया।

पहले दिन के कार्य के रूप में मिस्टर स्मिथ ने हमें निबंध लिखने का कार्य दिया। इससे पहले हमारे हिन्दी के टीचर ने निबंध के विभिन्न प्रकार भी बताए। उनसे हमें पता लगा की निबंध के मुख्य दो प्रकार , वर्णनात्मक निबंध और कथात्मक निबंध होते हैं। पहली बार तो यह शब्द हमें थोड़े अजीब लगे, लेकिन जब मिस्टर स्मिथ ने दोनों प्रकार के निबंध के नमूने लिख कर दिखाये तब हमें बहुत आसानी से सब समझ आ गया। उसके बाद क्लास के खत्म होने से पूर्व हमें घर से लिख कर लाने के लिए प्रस्ताव का कार्य भी दिया गया। इस कार्य के लिए हमसे कहा गया की हम अपनी किसी भी मन पसंद वस्तु, स्थान या व्यक्ति के बारे में वर्णन करें। इसके बाद हम सब वापस अपनी क्लास में आ गए।

स्कूल में दूसरे विषयों का पहला दिन

इसके बाद हमें अपने दूसरे विषयों जैसे म्यूज़िक, खेल और लाइब्रेरी के लिए हमें फिर से अपनी क्लास से बाहर जाने का मौका मिला। सबसे पहले हमें म्यूज़िक रूम में जाने का मौका मिला। वहाँ हम सभी बच्चे अपनी-अपनी पसंद के संगीत उपकरण के पास चले गए। कुछ बच्चों को उन्हें बजाना आता था, लेकिन कुछ बच्चे उन्हें बजाना सीख रहे थे। मुझे तबला बजाने का शौक है और मैं वो बजाना सीख रहा हूँ। मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगा की वहाँ अच्छी क्वालिटी के एक जोड़ी तबले की भी रखी थी। इसके बाद हम सबसे लाइन बना कर खेल के मैदान में जाने के लिए कहा गया। वहाँ हमारे खेल के टीचर मिस्टर जैकब थे, जिन्होनें हम सबसे अपना पसंदीदा खेल के बारे में पूछा। मुझे फुटबाल खेलना पसंद है। मुझे यह देखकर अच्छा लगा की मेरे सभी दोस्त भी फुटबाल खेलना पसंद करते थे। वहाँ से हमें लाइब्रेरी जाने का संकेत मिला।

इस स्कूल की लाइब्रेरी, मेरे भारत वाले स्कूल की लाइब्रेरी से कहीं अधिक बड़ी थी। वहाँ लाइब्रेरियन मैडम ने बताया की यह लाइब्रेरी कक्षा 4, 5, 6, 7 के बच्चों के लिए है।  यहाँ चारों ओर बड़ी-बड़ी अलमारियों में बहुत सारी किताबें बहुत अच्छी तरह से रखी हुईं थीं। इसके अलावा एक शीशे की अलमारी में कुछ मैगजीन भी रखी हुईं थीं। यह सब देखकर बहुत अच्छा लगा। अब तक मेरी अपने दोस्तों से बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी। हम चारों दोस्त सब जगह एक साथ ही जा रहे थे। हमने वहाँ देखा की अधिकतर बच्चे समूह में एक जगह से दूसरी जगह जाने की कोशिश कर रहे हैं। वहाँ मैडम ने हमें पढ़ने के लिए कुछ अच्छी-अच्छी किताबें भी दिन, जिन्हें हम सबने मन लगाकर पढ़ा।

कुछ देर बाद हमारी मैडम ने हम सबको वापस अपनी क्लास में जाने का संकेत दिया। अपनी क्लास में आते समय हम सभी दोस्त आपस में हँस कर बाते कर रहे थे। अब तक हम बहुत अच्छे और पक्के दोस्त बन चुके थे।

नए स्कूल में छुट्टी होने से पहले

अब तक नए स्कूल में मेरा पहला दिन बहुत अच्छा बीता था। यहाँ आकर मुझे नए दोस्त मिले थे, जो स्वभाव के बहुत अच्छे थे। इसके अलावा यहाँ मेरा मनपसंद खेल फुटबॉल खेलने का मौका मिला जिससे मुझे यह स्कूल अब बहुत अच्छा लगने लगा। इसके बाद हमारी छुट्टी होने का समय हो गया और हम सभी बच्चों को अपनी-अपनी बसों में बैठने के लिए लाइन लगाने के लिए कहा गया। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब मैंने देखा की मेरे सभी दोस्त मेरी ही बस में बैठने वाली लाइन में लगे हैं। इससे मुझे और भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्यूंकी अब हम सभी दोस्त हर समय साथ-साथ रह सकते हैं। अब हम सभी बस में बैठकर हँसते हुए और गाना गाते हुए घर की ओर लौट रहे थे।

स्कूल के बाद घर में

अपना स्कूल में पहला दिन बिताने के बाद घर आकर भी मेरी खुशी कम नहीं हुई थी। मैं इस बात से बहुत खुश था, की मुझे कल फिर उस जगह जाना है जो मेरी पसंद बन गया था। उम्मीद है स्कूल में मेरा पहला दिन आपके पहले दिन से कुछ अलग नहीं होगा।

मै आशा करता हूँ की आपको यह निबंध पसंद आया हो. अगर हां तो कृपया इस आर्टिकल को ५ स्टार रेटिंग दीजिये और निचे कमेंट सेक्शन में अपने विचार व्यक्त कीजिये. धन्यवाद. 🙂

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About the author

Ajay Chavan

प्रणाम दोस्तों, मैं हु अजय चव्हाण. मैं आप ही की तरह एक सरफिरा हु जो अपने ख्वाब पुरे करने और इस विश्व में अपनी पहचान बनाने निकल पड़ा हु.
मैं खुद को भाग्यशाली समझता हु की मेरी लिखाई लोगो के काम आती है.
और हां! मैं TeenAtHeart का Co-Founder और COO भी हु. :)