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गोपनीयता का अधिकार निबंध हिंदी में, Right to privacy essay in Hindi

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गोपनीयता का अधिकार निबंध हिंदी में

हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गोपनीयता के अधिकार के बारे में बहुत बड़ा क्रांतिकारी निर्णय दिया है| और सभी न्यूज़ चैनल यही विषय पर चर्चा कर रहे हैं| हम यहां पर आपको जो जानकारी दे रहे हैं उससे आप निबंध या भाषण बना सकते हैं, पर यह विषय थोड़ा गंभीर और जटिल है, तो हमने कोशिश की है कि आपको सीधी और सरल भाषा में गोपनीयता का आधार के बारे में जानकारी दें|

गोपनीयता का अधिकार निबंध हिंदी में (Essay on Right to privacy in Hindi)

एक अमेरिकी व्हिसल ब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन के खुलासे ने पूरी दुनिया के जनता को गोपनीयता के अधिकार पर सोचने पर मजबूर कर दिया| उसने खुलासा किया कि अमेरिकन सरकार उनके नागरिकों पर अवैध तरीकों से निगरानी रखती है| इस निगरानी के तहत सरकार नागरिकों के फोन नंबर,कॉल,ईमेल,सिक्योरिटी कैमरा फुटेज,और कंप्यूटर रिलेटेड डाटा जमा करती है, और यह किसी को बिना पूछे, बिना अनुमति के किया जाता है जो अमेरिकन संविधान के अनुसार गैरकानूनी है| स्नोडेन के खुलासे से पहले यह सब बातें क्लासीफाइड मतलब दुनिया से छुपाई जाती थी, पर उसके खुलासे के बाद अमेरिकी सरकार को यह जनता के सामने मानना पड़ा| अमेरिकी सरकार ने अपने बचाव में कहा कि वह ऐसा कर रही है क्योंकि उनको आतंकवादी गतिविधियों को ट्रैक करना होता है, और आज के आतंकवादी भी नवीनतम तंत्रज्ञान का उपयोग करते हैं| तो उनको पकड़ने के लिए, सबूत जमा करने के लिए ऐसे निगरानी करना अनिवार्य है| इस घटना के बाद पूरी दुनिया में गोपनीयता के आधार पर चर्चा होने लगी|

इस बात को बहुत साल बीत गए हैं, पर भारत में चंद दिनों पहले ही गोपनीयता के बारे में चर्चा शुरू हुई है| यह एक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुआ| देर से ही सही पर इस विषय पर चर्चा होना बहुत ही जरूरी था| अभी हम जानने की कोशिश करेंगे कि असल में गोपनीयता का अधिकार मतलब राइट टू प्राइवेसी होता क्या है?

क्या होता है गोपनीयता का अधिकार ?

गोपनीयता के अधिकार की कोई एक स्थिर परिभाषा नहीं है, पर इसे ऐसे बताया जा सकता है, “गोपनीयता का अधिकार हमें अपनी चारों तरफ निजी क्षेत्र रखने का अधिकार देता है जिसमें हमारा शरीर, घर, संपत्ति, विचार, भावनाएं, रहस्य और पहचान की गोपनीयता रख सकते हैं| गोपनीयता का अधिकार हमें यह चुनने की क्षमता देता है कि इस निजी क्षेत्र के कौन से हिस्से का कौन उपयोग कर सकता है, हम उनकी सीमाएं, वक्त नियंत्रित कर सकते हैं”| सीधी भाषा में हम ऐसा बोल सकते हैं कि हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपने निजी रहस्य,पहचान अपने तक रख सकते हैं, उसका कोई भी जबरन उपयोग नहीं कर सकता| अपने निजी तथ्य दूसरों को देने का अधिकार सिर्फ उसी के पास होगा| जब कोई बिना अनुमति के किसी के निजी क्षेत्र में प्रवेश करता है तो वह गैर कानूनी है| और इसे ही वायलेशन ऑफ प्राइवेसी कहा जाता है|

भारत में अभी तक गोपनीयता के अधिकार के बारे में बहस नहीं होती थी परंतु हाल ही में हुए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भारतीय लोग इस पर चर्चा करना शुरू किया है| सर्वोच्च न्यायालय के हिसाब से गोपनीयता का अधिकार / राइट टू प्राइवेसी यह हर नागरिक का मौलिक अधिकार है| इसका मतलब कोई भी दूसरा कानून इसका उल्लंघन नहीं कर सकता है| इस विषय के बारे में समाज में जागरूकता आना बहुत ही जरुरी है|

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