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होली त्यौहार पर निबंध हिंदी में, भाषण, परिच्छेद| Essay on Holi Festival in Hindi | Speech, Paragraph & Article

होली त्यौहार पर निबंध हिंदी में, भाषण, परिच्छेद Essay on Holi Festival in Hindi Speech, Paragraph & Article
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भारत में विविधता में भी एकता बसती है. भारत एक ऐसा देश है जहा कई धर्म जाती और वर्ण के लोग ख़ुशी और भाईचारे से रहते है. हम सभी धर्म के त्यौहार ख़ुशी से मानते है और सभी तिहारो का अपना एक महत्व है. दिवाली से लेकर ईद और क्रिसमस तक सभी त्यौहार हम बड़ी ख़ुशी से मानते है और इन्ही त्योहारों मई से एक है होली. भारत के सभी स्कूल और कॉलेजोमें विविध तरह है प्रतियोगिताएं जैसे की निबंध स्पर्था, वक्तृत्व स्पर्धा आयोजित की जाती है. और ऐसीही प्रतियोगिताओ के माध्यम से विद्यार्थियोंको अपना हुनर दिखाने का अवसर मिलता है और इसी लिए आपकी सहायता करने के लिए हम यहापर है. इस लेख के माध्यम से हम आपको होली के बारेमे आवश्यक जानकारी दे रहे है. ये जानकारी आपको एक उत्कृष्ट निबंध तथा एक बेहतर भाषण लिखने में सहायता करेगी. आप यह जानकारी अपनी जरुरत अनुसार निबंध तथा भाषण में बदल सकत है.

होली त्यौहार पे निबंध हिंदी में  (साधारण ११०० शब्द)

होली, एक रंगो का त्यौहार जो पुरे भारत में मनाया जाता है. होली का त्यौहार अच्छाईका बुराई पर विजय तथा सर्दियोंका अंत और बसंत ऋतू का आगमन दर्शाता है. लोग घरो से बाहर निकलकर पूजा करते है, एक दूसरे से मिलते है और रंगो से खेलते है. यह वक्त आपस के द्वेष भूलकर अपने प्रियजनोंके साथ खुशिया मनाने का होता है. होली अच्छी फसल आने के जश्न में भी मनायी जाता है.

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार होली २ दिन है त्यौहार होता है, जिसकी शुरुवात फाल्गुन महीने के पूर्णिमा की शाम को होती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार होल के त्यौहार फरवरी और मार्च महीने के दरमियान आता है.  इस साल २०१७ में होली २ मार्च २०१८ के दिन मनाई जाएगी. होली के पहले दिन के छोटी होली बोलते है. इस दिन शाम को लोग होलिका दहन करते है. लोग साथ मिलकर होलिका के सामने  भगवान की पूजा प्रार्थना करते है और अंत में उसे जलाया जाता है.

शुरुवात के दिनों में गांव के लोग मिलकर जंगलो में जाकर लकड़ी और घास जमा करके लेके आते थे और पुरे गांव में एक ही बड़ी होलिका के दहन करके गांव के सभी लोग साथ मिलकर होली मनाते थे. पहले होली लोगो को साथ लानेमें एक प्रेरित करती थी लेकिन अब बाजार में जाकर लकड़ी और घास लेकर अपनी अपनी होली जलाते है. इससे होली का लोगो का साथ लाने के जो मूल हेतु है वो धीरे धीरे नाकामयाब हो रहा है.

होली के दूसरेदिन का रंगवाली होली बुलाया जाता है. भारत के पश्चिमी राज्यों में इसे रंग पंचमी भी बुलाया जाता है. पहले के दिनों में लोग होली की राख के साथ रंगवाली होली मनाते थे लेकिन अब ये प्रथा विलुप्त हो चुकी है. पहले गुलाल हल्दी, कुमकुम, चन्दन पाउडर और जड़ीबूटियोंसे से बनाया जाता था. लेकिन आजकल लोग होली खेलने के लिए हानिकारक रंग, पानी के गुब्बारे, तथा वाटर गन का इस्तेमाल करते है. लोग अपने ऑफिसमे भी होने मनाते है.

होली के मूल तथा धार्मिक महत्व

भारत में होली के बारे में कई दन्तकथाए है लेकिन भक्त प्रल्हाद की कथा सबसे पूजनीय मानी जाती है. राजा हिरण्यकशिपु के बेटे के नाम प्रल्हाद था जो भगवन विष्णु के बहुत बड़ा भक्त था. वो दिन रात भगवन विष्णु के नाम के जाप करता था. उसके पिता राजा हिरण्यकशिपु का यह बात बिलकुल पसंद नहीं थी क्योंकि वो बहगवां पे विश्वास नहीं करता था. एक दिन उसको प्रल्हाद के इतना गुस्सा आया की उसने उसे मारने के कट रचा. राजा ने अपनी बहन होलिका का बुलाया, जिसके पास एक जादुई लबादा था जिसपर आग के कोई असर नहीं होता था. होलिका प्रल्हाद का लेकर एक जलती चिता पर बैठ गयी. उसे लगा की चिता की आग पररलहद का जलाकर भस्म क्र देगी. लेकिन वास्तविक में होलिका जल के भस्म हो गयी और प्रल्हाद का कुछ भी नहीं हुआ. भगवन विष्णु के कृपा ने उसे बचा लिया था. इसी लिए लोग छोटी होली के दिन होलिका दहन करते है. जो की बुराई का नाश होकर बुराई के विजय दर्शित करता है.

दूसरी किवदंती के अनुसार देवी राधा के भगवन श्रीकृष्ण के प्रति अपर प्रेम के सम्मान में होली मनाई जाती है. एक और किवदंती के अनुसार होली क़ो भगवन शंकर और देवी पार्वती के साथ जोड़ा जाता है. उसके अनुसार देवी पार्वती बसंत पंचमी के दिन प्रेम के देवता कामदेव क़ो प्रसन्ना करती है और उन्हें भगवन शंकर जी क़ो अपनी तपस्या से उठाने के निवेदन करती है. उसके बाद भगवन शंकर बढ़ेगी क्रोधित होते है और कामदेव क़ो भस्म कर देते है. इस सब से  देवी पार्वती और कामदेवी की पत्नी देवी रती बहुत ही दुखी हो जाती है. देवी रती बसंत पंचमी से चालीस दिन तस तप करती है. उसके बाद भगवन शंकर कामदेव क़ो क्षमा करते है और उन्हें फिरसे जीवित करते है.

होली की सीख तथा महत्त्व

होली जैसे त्योहारों से हमे बहुत ही बड़ी सीख मिलती है जोकि आजके समय में भी बहुत उपयुक्त है. भक्त प्रल्हाद की कहानी से हमें यह सीख मिलती है की अंत में हमेशा अच्छाई की ही जीत होती है. आजकल के बढ़ते भ्रष्टाचार और अपराधों क़ो देखर यही लगता है की इस सीख की हमे बहुत ज्यादा जरुरत है. हमें होली की तरफ एक धर्मनिरपेक्ष दृष्टी से देखने की जरुरत है.

होली कडाकेकी ठण्ड ख़तम होने के और बसंत ऋतु के आगमन के जश्न है.ज्यादा ठण्ड से जानवरो, इंसान और फसल पे बहोत गहरा परिणाम होता है. बसंत ऋतु के आने से ठण्ड ख़तम हो जातिओ है और पेड़ पौधे फिरसे खिल उठते है. मानो उनमे एक नै जान आ गयी हो. इससे हम एक बहोत बड़ी सीख मिलती है. हमारे जीवन में हम कई चुनौतियों के सामना करते है और अंत में सब कुछ अच्छा हो जाता है. जिंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते है. हमे कठिन परिस्तिथिओ के सामना करना चाहिए और अच्छे वक्त क़ो प्यार से उत्सव करना है.

भारत के साथ साथ गुयाना, त्रिनिनाद, टोबैगो, मॉरिशस, नेपाल, पाकिस्तान जैसे देशोमे भी ऐसे कई समुदाय है जो होली मनाते है.

दुःख की बात यह है की पाश्चिमात्य देशोमे होली क़ो एक पवित्र त्यौहार के बजाय पार्टी का रूप दे दिया गया है जिसमे लोग जोरदार गाने बजाकर मद्यधुंद अवस्था में नाचकर होली खेलते है.  हमे ख़ुशी है होली जैसा भारत के एक त्यौहार सीमापार के देशो में भी लोकप्रिय हो रहा है लेकिन उन्हें होली के असली अर्थ और महत्व जानना चाहिए.

होली के बारे में चल रहे विवाद

लोग बाजारों में से ख़रीदे हुए अनैसर्गिक रंगोका इस्तेमाल होली में करते है. इन रंगो में हानिकारक रसायन होते है. तो इंसानी त्वचा के लिए घातक होते है. और कई लोग इसी वजह से होली के त्यौहार का विरोध भी करते है. दूसरी विवादात्मक बात यह है की लोग होली खेलने के लिए पानी का बहुत ही ज्यादा इस्तेमाल करते है. कई लोग इस बात के विरोध करते है.

Tips of Essay on Holi Festival in Hindi

  1.  निबंध के विविध प्रकार होते हैं, और उस प्रकार के अनुसार आपको निबंध लिखना होता है |
  2. निबंध प्रमुखतः तीन सेक्शन में विभाजित होतें है, परिचय या प्रस्तावना, कोर सेक्शन और निष्कर्ष.

Tip for Speech on Holi Festival in Hindi

  1. अगर आप पहिली बार भाषण दे रहें तो, दोस्तोंके सामने इसकी प्रैक्टिस कीजिये, अगर आपके मदत के लिए कोई नहीं है तो आप आयने के सामने भी प्रैक्टिस कर सकते हैं|
  2. हमारा आपसे अनुरोध है की, हो सके तो भाषण का दिया गया विषय समझने की कोशिश कीजिये| भाषण का रट्टा मत मारिये, इससे आपको कुछ हासील नहीं होगा, आपका भाषण रोबोटिक लगेगा और इससे आप आपके ऑडियंस से कनेक्ट नहीं कर पाएंगे|

अगर आपको मेरा यह जानकारी देने का प्रयत्न अच्छा लगा हो तो कृपया इस आर्टिकल को निचे रेटिंग दीजिये. निचे कमेंट सेक्शन इ आप आपके विचार तथा सुझाव हमे दे सकते है. धन्यवाद. 🙂

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