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डिमोनेटाइज़ेशन / विमुद्रीकरण शाप या वरदान – ग्रुप डिस्कशन GD टॉपिक्स २०१७ हिन्दी में

डिमोनेटाइज़ेशन विमुद्रीकरण शाप या वरदान - ग्रुप डिस्कशन GD टॉपिक्स २०१७ हिन्दी में

बीते पांच, छह महिनोंसे डिमोनेटाइज़ेशन या विमुद्रीकरण पर हर जगह चर्चा हो रही है, हर गली , नुक्कड़, चोराहेपे विमुद्रीकरण की ही चर्चा है| देसी विदेसी न्यूज़ चैनल्स इसी विषय पर चर्चा कर रहें हैं | विमुद्रीकरण अभी तक का सबसे बड़ा आर्थिक निर्णय कहा जा सकता हैं | इस एक निर्णय से आमिर से लेके गरीब, सुशिक्षित से लेके अनपढ़ सब प्रभावित हुए हैं|

डिमोनेटाइज़ेशन या विमुद्रीकरण पे हर जगह चर्चा हो रही हैं तो फिर स्कूल, कॉलेजेस, इंटरव्यू कैसे बचेंगे| आप अगर स्कूल या कॉलेज में जातें हैं तो आप को इस विषय पर स्पीच, निबंध या पैराग्राफ लेखन पूंछा जा सकता हैं| वैसे ही जॉब इंटरव्यू के ग्रुप डिस्कशन के राउंड में यह टॉपिक दिया जा सकता है|

यह लेख हमने ग्रुप डिस्कशन के अनुषंग से लिखा है, पर आप यह जानकारी वकतृत्व या निबंध प्रतियोगितायों में भी उपयोग कर सकते हैं|

विमुद्रीकरण पर चर्चा – ग्रुप डिस्कशन

चर्चा में हमेशा दो पहलू होतें हैं, एक चर्चा के समर्थन में और एक उसके खिलाफ| इस लेख में हम दोनों बाजू देखेंगे|

विमुद्रीकरण के पक्ष में

१. जनता का सहयोग

कोई कुछ भी कहें पर आम जनता ने मोदीजी के विमुद्रीकरण के निर्णय को एक तरह से बढ़ चढ़कर समर्थन दिया है| अभी हुए महाराष्ट्र के इलेक्शन का परिणाम देखिये, बीजेपी ने लगभग हर जगह बाजी मार ली हैं, और कांग्रेस का नो बूरा हाल हुआ है| इससे हम यह अंदाज़ा लगा सकते हैं की, आम जनता PM मोदीजींको समर्थन दे रहीं हैं|

२. मार्केटिंग स्किल्स

मोदीजीने पहले कहाँ की विमुद्रीकरण से काला धन काबू में आएगा और बादमे कॅश लेस सोसाइटी की बात की| सब लोगों ने उनकी निंदा की पर यह स्ट्रेटेजी का बदलाव भी उनके बाजू हुआ| लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट करना चालू किया, अब लगभग हर रिक्शा वाला, किराने वाला Paytm से पैसे लेता है| इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर से मनी ट्रांसक्शन पारदर्शी हो जाता है, आगे जाके इससे काला धन नियंत्रण करने में जरूर मदद होगी.

३. एक प्रभावशाली नेता

अब तक हमने बहोत सारे नेता देखे जो बड़े निर्णय लेने से डरते थे चाहे उससे देश की उन्नति में बाधा क्यों ना आएं, मुझे शायद उदहारण देनी की जरूरत नहीं हैं, आप समझ गएँ होंगे| और आज यह एक नेता हैं जो अकेले के बुते इतना बड़ा निर्णय लेता हैं| इससे प्रतीत होता हैं की PM मोदीजी एक कुशल नेता और राजनेता हैं, वे बड़े निर्णय ले सकते हैं|

४. राजनीती का खेल

सारी राजनैतिक पार्टीयोंने विमुद्रीकरण पर अपनी अपनी राजनीती की, पर वहां भी PM मोदीजीने बाजी मार ली| सोचिये के अगर सारी जनता नोटबंदी के खिलाफ हो जाती तो| सब विरोधी पार्टियां इसपे अपनी रोटियां सेक लेती, बीजेपी को बड़ा नूकसान हो सकता था| पर भर देश के भलाई के लिये उन्होंने यह निर्णय लिया, और देश को समजाया की विमुद्रीकरण क्यों जरूरी है| और लोगों ने उनका समर्थन किया| इससे समझ में आता है की मोदीजी राजनीती के एक धुरंधर खिलाडी हैं|

विमुद्रीकरण के खिलाफ

१. प्लानिंग और एक्सेक्यूशन

मोदीजीने विमुद्रीकरण के लिए ५० दिन की अवधि मांगी थी पर वे वक्त रहते हुए सब काम नहीं करावा पाएं, इससे आम आदमी को बहोत तखलीफ का सामना करना पड़ा| कुछ लोग एटीएम के लाइन में मूर्छित हुए तो कुछ मर गए| मोदीजीने इसकी अच्छेसे प्लानिंग नहीं की थी, उनके बजेसे आम लोगोंको बहोत तखलीफ उठानी पड़ी|

२. छुट्टे की खिल्लत

५०० के नोट और १००० के नोट बंद करके बस २००० के नए नोट बाज़ार में आये| ना रिक्शावाला, ना किरानेवाले, ना मेडिकल वाला २००० का छुट्टा देता है| १००, २०० का जादा का सामान खरीदना पड़ता है तब जाके छुट्टे मिलते हैं, इस कारण लोगोंका का खर्च बहोत बड़ा|

३. सुस्त बैंक्स
बेन्कोनो भी अपने एटीएम मशीन कैलिब्रेट करने में बहोत टाइम लगाया, इससे आम आदमी को बहोत तखलीफ झेलनी पड़ी|

४. लूपहोल्स
जो बड़े लोग थे जो कालाबाज़ारी करते हैं, उनोन्हे तो अपना कला पैसा जलाया या फिर किसी और जगह इन्वेस्ट किया, वह लोग तो छूट गए बस हम जैसो को ही तखलीफ हुई|

५. छापखाना
बैंक वक्त रहते जितना जरूरी था उतना पैसे छाप नहीं पाया|

६. ५०० और २०००
५०० का नोट अगर २००० के नोट साथ लाते तो मुश्किल थोड़ी आसान हो सकती थी.

ग्रुप डिस्कशन के लिए महत्त्वपूर्ण टिप्स

१. किसी भी हालत में एक चीज़ का ध्यान रखिये की यह एक ग्रुप डिस्कशन हैं , ग्रुप डिबेट नहीं| जादा तर इंटरव्यू उमेदवार यह फर्क नहीं कर पाते और सामने वाले प्रतिस्पर्धी से झगड़ पड़ते हैं|
२. HR मेनेजर या जीडी कोऑर्डिनेटर को देखके मत बोलिये, प्रतिस्पर्धी के तरफ देखके बोलिये|
३. ग्रुप डिस्कशन का आयोजन इस लिए किया जाता है की कंपनी आप की लीडरशिप, इंग्लिश, एनालिटिकल कुवत नाप तोल सके|
४. और एक चीज़, जो जादा बोलता है उसको जादा मार्क्स मिलतें हैं यह मिथ दिमाग से निकालें| आप कितना असरदार बात करते हैं वह महत्त्वपूर्ण होता है|
५. अगर आप लीड नहीं कर पाते होतो कम से कम चर्चा में हिस्सा जरूर लें, चुप छाप ना रहें.|
६. कोई भी आपको सामने से बोलने के लिए नहीं पूछेगा आपको जगह देखकर अपना पॉइंट बोलना होता हैं|

हम आशा करतें हैं की “विमुद्रीकरण शाप या वरदान/ लाभ या हानि/ फायदा या नूकसान” ग्रुप डिस्कशन का लेख आपको आपके इंटरव्यू (जीडी राउंड) में मदत करेगा| अगर आपको हमारा प्रयास अच्छा लगा हो तो प्लीज निचे कमेंट कीजिये..

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About the author

Sueniel

He is a techie, geek or you can call him a nerd too. He likes to read, observe stuff and write about it. As Simple as that...

He is also CEO and Co-Founder of TeenAtHeart.