व्रत और उपवास हिंदी

प्रदोष व्रत तिथि, विधि,अर्थ, महत्व, कथा – २०१८ पूजा का समय, काल

Pradosh Vrat 2018 2019 2020 - Dates List, Katha, Pooja Vidhi, Meaning, Significance

प्रदोष या प्रदोषम एक महीने में दो बार आता है। हिन्दू कैलेंडर में हर पखवाड़े (१५ दिन) के हर तेरहवें दिन यह आता है, मतलब शुक्ल पक्ष त्रयोदशी और कृष्ण पक्ष त्रयोदशी दोनों तिथियों पर प्रदोश व्रत मनाया जाता है। कुछ लोग इसे शिव प्रदोष व्रत भी कहते हैं क्योंकि यह पूजा और व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है।

भगवान शिव की पूजा करने का सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के १.५ घंटे पहले और १.५ घंटे के बाद का होता है, प्रदोष तिथि के इस ३ घंटे के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। इस अवधि के दौरान जो व्रत किया जाता है उसे “प्रदोष व्रत” कहा जाता है| जब प्रदोष तिथि सोमवार को आती है तो उसे सोम / सोमवार / सोमैया प्रदोष व्रत कहा जाता है| जो भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और शिव की पूजा करते हैं, उन्हें अच्छे स्वास्थ्य और उनकी सभी इच्छाएं पूरी होने का वरदान मिलता है । भूम / भोम प्रदोष मंगलवार को आता है, इसे अच्छे स्वास्थ्य और बीमारियों के निवारण का आशीर्वाद भक्त पाता है। भगवान् शिव बुधवार प्रदोष काल में उपवास करने वाले लोगों की इच्छाओं को पूरा करतें है। गुरु प्रदोष गुरुवार को आता है, इसे जमा पापों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है| शनि प्रदोष बहुत शुभ होता है, यह भक्तों को खुशहाल विवाहित जीवन का आशीर्वाद देता है। जिन लोगों के बच्चे नहीं हैं, उनके लिए शनि प्रदोषम व्रत बहोत अच्छा हैं। (आप लेख के अंत में प्रदोष तिथि और समय की लिस्ट देख सकते हैं)

प्रदोष का अर्थ

प्रदोष का अर्थ बहुत ही सरल है, प्रदोष मतलब पापों को दूर करने वाला व्रत, अन्य भाषाओं जैसे हिंदी, मराठी, बांग्ला में इसका अर्थ है पाप मोचन।

प्रदोष पूजा व्रत का महत्व और लाभ

कुछ व्रत और पूजा सुबह में की जातीं है, कुछ दोपहर में होते तो कुछ शाम को इसके लिए कारण होता है। प्रत्येक त्रयोदशी पर शाम (ट्वाईलाईट) पर प्रदोष व्रत और पूजा की जाती है, सूर्यास्त के डेढ़ घंटा पहले और डेढ़ घंटा बाद। हम हमारे प्रयासों में सफलता पाने के लिए और हमारी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव की पूजा है। भगवान् शिव हमें जन्म-मृत्यु के चक्र से भी मुक्त कर सकते है|

कल्पना कीजिये अगर आप अपने माता-पिता से कुछ चाहते हैं, तो उनसे संपर्क करने का सबसे अच्छा समय क्या होगा? संभावित विकल्प होंगे, उनका अच्छा भोजन होने के बाद, या वे खुश माहौल में होंगे तब, है ना? फिर अधिक संभावनाएं हैं कि वे हम जो चाहते हैं हमें दे देंगे। प्रदोष काल वह समय है जब भगवान् शिव और देवी पार्वती खुश होतें है, आप उनका आशीर्वाद पाने के लिए इस काल में उनकी पूजा कर सकते हैं। इस समय के दौरान वे बहुत खुश होते हैं, ऐसा भी कहाँ जाता है की वे इस अवधि के दौरान वे दिव्य नृत्य करते हैं। प्रदोष काल (समय) हमारे पापों से छुटकारा पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने का सबसे अच्छा समय है।

इस व्रत की कई हिंदू शास्त्रों की सिफारिश की गई है, यह शिव भक्तों के लिए बहुत महत्व रखता है। प्रदोष पूजा के दौरान भेट चढ़ाया बेल का एक पत्ता भी सौ महापूजाओंके सामान होता है। यहाँ तक की इस काल में बस भगवान् शिव का दर्शन करना भी बहुत पुण्य की बात है|

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

शिव भक्त प्रदोष तिथि पर पूरा दिन उपवास करते है और रातमें जागरण करतें है। वे सूर्यास्त से एक घंटा पहले स्नान करते हैं और फिर भगवान शिव, देवी पार्वती, गणेश, स्कंद और नंदी की पूजा करते हैं। गणेशजी की पूजा के बाद, भगवान शिव कलश के रूप में चौकोनी मंडल के ऊपर स्तापित किए जातें है । उस रंगोली पर कमल के फूल का चित्र निकालते है और उसपर दर्भा की घास फैलाई जाती है| उसके बाद भक्त प्रदोष व्रत की कहानी पढतें है और फिर वे १०८ बार महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करते हैं। उसके बाद कलश पानी निकाला जाता है, पवित्र राख को माथे पर लगाया जाता है और जो पानी भगवान् के स्नान के लिए उपयोग होता है उसे प्राशन किया जाता है। पूजा समाप्ति के बाद, एक मिट्टी का बर्तन, एक सूती कपड़ा, और भगवान शिव की प्रतिमा ब्राह्मण को दक्षिणा के रूप में दी जाती हैं|

प्रदोष व्रत की कथा / कहानी

इस व्रत की बहुत सारी कथायें है, उसमे से यह एक है। एक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत और जहर बाहर आया। कोई भी जहर लेने के लिए तैयार नहीं था और सभी को अमृत चाहिए था। भगवान शिव ने जहर पिया, देवी पार्वती ने अपना हाथ उसकी गर्दन पर रखा। शिवजी की गले में ज़हर जमा हुआ, तब से उन्हें नीलकंठ कहा जाता है। सभी देवों और असुरस को अमृत मिला था और वे खुश थे और वे जश्न मना रहे थे। इस सब के दौरान, वे सभी देवता और असुर शिवजी को धन्यवाद देना भूल गए| लेकिन तेरहवें दिन (त्रयोदशी पर) उन्होंने अपनी गलती का एहसास किया और भगवान शिव के शरण में गए| शिवजी ने उन्हें माफ कर दिया। ऐसा माना जाता है कि यह प्रदोष काल था।

प्रदोष मंत्र और स्त्रोत

प्रदोष व्रत पूजा के दौरान शिवजीके अलग अलग मंत्रोंका उच्चारण किया जाता है, सबसे ज्यादा महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप किया जाता है| निचे हमने महामृत्युंजय मंत्र दिया है|

त्र्यं॑बकं यजामहे सु॒गन्धिं॑ पुष्टि॒वर्ध॑नम् ।
उ॒र्वा॒रु॒कमि॑व॒ बन्ध॑नान् मृ॒त्योर् मु॑क्षीय॒ माऽमृता॑त् ।

ज्यादा जानकारी के लिए यह वेबसाइट देंखें – http://www.saivism.net/prayers/index.asp

प्रदोष काल (समय) और तिथियां साल २०१८ के लिए

यहां पर हमने २०१८ पूर्ण वर्ष की प्रदोष दिनांक, दिन और समय की सूची दी है|

Date Day Pradosha Kaal- Puja Time
14-January-2018 Sunday 17:57 to 20:37
29-January-2018 Monday 18:08 to 20:44
13-February-2018 Tuesday 18:17 to 20:51
27-February-2018 Tuesday 18:25 to 20:54
14-March-2018 Wednesday 18:31 to 20:57
29-March-2018 Thursday 18:37 to 20:59
13-April-2018 Friday 18:43 to 21:00
27-April-2018 Friday 18:48 to 21:03
13-May-2018 Sunday 18:56 to 21:06
26-May-2018 Saturday 19:02 to 21:10
11-June-2018 Monday 19:08 to 21:15
25-June-2018 Monday 19:12 to 21:19
10-July-2018 Tuesday 19:12 to 21:20
24-July-2018 Tuesday 19:08 to 21:18
9-August-2018 Thursday 19:00 to 21:13
23-August-2018 Thursday 18:49 to 21:05
7-September-2018 Friday 18:35 to 20:55
22-September-2018 Saturday 18:19 to 20:43
6-October-2018 Saturday 18:05 to 20:33
22-October-2018 Monday 17:51 to 20:23
5-November-2018 Monday 17:42 to 20:17
20-November-2018 Tuesday 17:37 to 20:15
4-December-2018 Tuesday 17:36 to 20:17
20-December-2018 Thursday 17:41 to 20:22

Note: You can read English version of this article here- Pradosh Vrat 2018 Dates, Meaning, Vidhi, Katha

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