GST - Goods and Services Tax Essays

Speech, Essay on GST in Hindi | जीएसटी पर निबंध और भाषण – हिन्दी में | GST Kya Hai?

Speech Essay on GST in Hindi जीएसटी निबंध भाषण हिन्दी

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भारत बिजली की गति के साथ प्रगति की ओर बढ़ रहा है, और इस गति को कायम रखने के लिए भारत सरकार को बढ़े बढे निर्णय करने पढ़ेंगे| विमुद्रीकरण (डेमोनेटिज़ेशन) के बाद, जीएसटी विधेयक भारत में सबसे बढ़ा सुधार है। जीएसटी विधेयक के अनुसार, सभी जटिल और कई अप्रत्यक्ष करों को एक अंतिम कर से बदला गया है जो कि जीएसटी है। हम इस लेख मैं जीएसटी और इसके विभिन्न पहलुओं के बारे में चर्चा करेंगे|

इस लेख में, हमने आपको एक बेहतरीन निबंध और भाषण दिया है जो आपको निबंध या भाषण प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त होगा। खासकर कॉमर्स वाले छात्रोंको इसका बहोत उपयोग होगा| यहाँ दी गयी जानकारी का उपयोग आप जीडी मतलब ग्रुप डिस्कशन या डिबेट में भी कर सकते हैं । यह निबंध आपके यूपीएससी जैसे बढे परीक्षाओंके पढाई में भी हो सकता है| हमे पूरा यकीन है कि जीएसटी हर स्कूल और कॉलेज में भी चर्चा का विषय होगा। तो चलो शुरू करते हैं।

Speech, Essay on GST in Hindi जीएसटी पर भाषण / निबंध  (माल और सेवा कर)

सम्माननीय मुख्य अतिथि श्री ए.बी.शर्माजी, आदरणीय प्रिंसिपल सर, सभी उपस्थित प्रोफेसर, और मेरे प्रिय दोस्तों; भारत तेजी से बदल रहा है, हमारे देश को बेहतर बनाने के लिए हमारी सरकार ने कई योजनाएं और सुधार किये है, ऐसीही एक पहल जीएसटी बिल है। और आज हम जीएसटी के बारे में ही बात करने वाले हैं | आप सबकी इजाजत से पे अपने भाषण की शुरवात करना चाहूंगा|


Check English Speech Essay on GST Here
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जीएसटी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए उठाया गया बड़ा कदम हैं| जानकारी की आभाव से बहोत सारे लोग इसका तिरस्कार भी कर रहें हैं| यह एक दूरदर्शी फैसला है, इससे अर्तव्यवस्थाको अभी कुछ साल शायद थोड़ी तखलीफ होगी, पर यह भविष्य में यह अपना असर दिखायेगा| क्या आप जानते हैं की उद्योजक, उत्पादक, डिस्ट्रब्यूटर, व्होलसेलर, रिटेलर की सबसे बड़ी परेशानी क्या होती हैं? कर, टैक्स, जी हाँ , भारत के पुराणे कर सिस्टम में बहोत सारे कर थे, जैसे वैट, सेल्स टैक्स, एंटरटेनमेंट टैक्स और बहोत सारे| जीएसटी ने इस उलझन से राहत दी है, अब बस एक ही कर होगा, और उसे जीएसटी कहाँ जाएगा|

जीएसटी का पूरा रूप गुड्स और सर्विसेज टैक्स है। जीएसटी एक सरल, परिष्कृत और उपभोक्ता-अनुकूल तरीका है जिससे भारत सरकार व्यवसायोंसे कर जमा करेगी। जीएसटी भारत में पिछले अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों को बदलने के लिए लागू किया गया है, यह एक सरल, समान कर प्रणाली है| जीएसटी एक खपत आधारित कर (consumption based tax) है जिसका मतलब है कि जिस राज्य द्वारा जिस उत्पाद या सेवा का सेवन किया जाता है, वहीं राज्य कर जमा करेगा, ना की वह राज्य जहाँ उसका उत्पादन हुआ था| जीएसटी टैक्स सिस्टम “दोहरी जीएसटी” (Dual GST) का रूप लेगा जो केंद्रीय और राज्य सरकार द्वारा समवर्ती लगाया जाता है।

जीएसटी तीन प्रकार के करों से बना है और ये सीजीएसटी, आईजीएसटी, एसजीएसटी या यूटीजीएसटी हैं जो माल और सेवा के मूवमेंट्स से निर्धारित होता हैं, जैसे इंट्रास्टेट मूवमेंट्स या अंतरराज्यीय मूवमेंट्स|

कई अर्थशास्त्री और विशेषज्ञ कहते है कि जीएसटी विधेयक लंबे समय में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। यहां पे हमे एक बात समझनी पड़ेगी की, भारत एक सामूहिक (Federal) अर्थव्यवस्था है जहां प्रत्येक राज्य के अपने नियम, क़ानून होते हैं। इससे देश की आर्थिक प्रगति की गति धीमी हो जाती है, व्यवसायों के लिए कठिनाइयों का और कर चोरी और भ्रष्टाचार की उच्च संभावनाएं पैदा होती हैं। कर भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए और सरकार के साथ-साथ व्यापार दोनों के लिए एक विन-विन वातावरण बनाने और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए, जीएसटी विधेयक भारत में पेश किया गया हैं|अब हम यह समझने की कोशिश करतें हैं कि यह भारतीय बिसिनेसेस के लिए अच्छा क्यों है?

जीएसटी एक सरल कर प्रणाली है अब, करदाता को किस प्रकार के करों को भुगतान करना चाहिए, इसके बारे में भ्रमित नहीं होगा। केवल एक कर होगा, जो जीएसटी है। जीएसटी को शुरू करने के पीछे सरकार का एजेंडा है “एक राष्ट्र, एक कर”| जीएसटी भारतीय व्यवसायों और निर्माताओं से करों के तनाव को कम करने जा रहा है। अब उन्हें कम कर देना पड़ता है, और इससे निश्चित रूप से एक बेहतर कारोबारी माहौल और लचीलेपन की संभावना बढ़ जाएगी। स्वीडन, डेनमार्क, जर्मनी, स्विटजरलैंड, जापान जैसे विकसित देशों ने कर संग्रह के लिए एक कॉमन सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए जीएसटी (माल और सेवा कर) स्वीकार किया है। जीएसटी वैश्विक व्यापार के लिए एक मानक बन गया है और भारत विकास के लिए प्रगति कर रहा है, हमे एक समान, परिष्कृत कर प्रणाली को गले लगाने की आवश्यकता है जो जीएसटी है। जीएसटी निश्चित रूप से करदाताओं की संख्या में वृद्धि करेगा, जो टैक्स की दरों को कम करने में मदद करेगा क्योंकि अधिक लोग कर जमा करेंगे।

कैस्केडिंग टैक्स प्रभाव को हटाना जीएसटी का एक और फायदा है। सरल शब्दों में कहें तो “कैस्केडिंग कर प्रभाव” का मतलब हे की, पिछले कर प्रणाली में, अंतिम उपभोक्ता तक उत्पादन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सामानों पर टैक्स लगाया जाता था। कैस्केड टैक्स एक प्रकार का टर्नओवर टैक्स है, जिस पर किसी भी पिछले कैस्केड करों को लगाया जाता था । इससे अंतिम उपयोगकर्ता पर करों का बोझ उत्पन्न होता है, इसलिए जीएसटी में कोई कैस्केड कर नहीं होगा|

जीएसटी की समस्याएं (Problems with GST)

जैसे कि हर सिक्के के दो पक्ष हैं, यहां तक कि जीएसटी की अपनी कमियां और नुकसान भी हैं। जीएसटी, भारत में शुरू की गई नई कर प्रणाली है, आम आदमी को इसकी पूरी जानकारी नहीं है, यह पूरे बड़े परिवर्तन को पचाने और जीएसटी से परिचित होने में समय लेगा। साथ ही, सभी व्यवसाय सॉफ्टवेयर, अकाउंटिंग और ईआरपी सॉफ्टवेयर जैसी प्रक्रियाओं को नवीनतम टैक्स सिस्टम के साथ अद्यतन करने की आवश्यकता है। जीएसटी के अंतर्गत कुछ सेवाएं महँगी भी हो जाएंगी जैसे टेलीकाम, एयरलाइंस, बैंकिंग, बीमा आदि.

जीएसटी के तहत अब हर महीने करा भरना पड़ता है, और समय पर कर न भरनेसे दंड भी भरना पड़ेगा, छोटे उद्योजक को इसके कारण परेशानियोंका सामना करना पड रहा है| इन्वॉइसेस भी जीएसटी के नियम के तहत होने जरूरी है, एक साधारण उद्योजक यह सब खुद नहीं कर पा रहें है, इसके लिए उसे नए सॉफ्टवेयर और टूल्स की जरूरत होगी या फिर महँगी सी.ये. (C.A) की सेवा के लिए भुगतान करना पड़ेगा|

हालांकि यह कहा गया है कि जीएसटी के तहत केवल एक ही टैक्स होगा, वास्तव में, जीएसटी टैक्स के ६ स्लैब है जैसे 0% (छूट वाले सामानों के लिए), ३%, ५%, १२%, १८% और २८%। जिनके ऊपर विभिन्न उपकरों (Cess) का भुगतान किया जाना होता है।

अन्य छोटी छोटी समस्याएं भी हैं, जो जीएसटी की वजह से प्रत्यक्ष रूप से उत्पन्न नहीं हुईं बल्कि इसके अप्रत्यक्ष प्रभावों के कारण हैं। छोटे निर्माता जो उच्च कर लगाए गए पदार्थों के साथ काम कर रहे हैं वे उच्च करों से बचने के लिए अपंजीकृत विक्रेताओं से सामान खरीदते हैं, इससे एक तरह से टैक्स चोरी ही होती है । कुछ होटल और रेस्टोरेंट जीएसटी का लाभ लेने के कोशिश में ग्राहकोंसे उच्च कर वसूल रहें है। इसी तरह, जीएसटी के बहाने कई व्यवसायों ने कीमतें अंधाधुंद बधाई है|

सरकार अभी भी कर ब्रैकेट्स को संशोधित करती रहती है| जीएसटी से कर भुगतान (टैक्स फाइलिंग) प्रक्रिया आसान होने का दावा किया गया था पर कारोबार अभी भी प्रक्रिया को समझने में सक्षम नहीं है। एक वर्ष और अधिक समय होने के बाद भी छोटे व्यवसाय कर भुगतान समय पर पूर्ण नहीं कर रहें है।
आये दिन बदलते प्रकियोंके कारण चार्टर्ड एकाउंटेंट अपनी शुल्क संरचना पक्की नहीं पा रहें है|

जीएसटी टैक्स फाइलिंग एक पूर्ण ऑनलाइन प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मालिक या अधिकृत कर्मियों के डिजिटल हस्ताक्षर (डीएससी) की आवश्यकता होती है। बड़े व्यवसाय इस डिजिटल हस्ताक्षर तकनीक और उसके सुरक्षा सावधानी के बारे में जानते हैं। लेकिन छोटे, मध्यम या नए व्यापार मालिकों को यह समझ में नहीं आता है। वे अपने डीएससी डोंगल को सीए या अकाउंटेंट को देते हैं। यह एक बड़ी सुरक्षा चूक है, उनके डिजिटल हस्ताक्षर की चोरी हो सकती है और गलत उद्देश्य के लिए उसका उपयोग किया जा सकता है। (यदि आप किसी को जानते हैं जो अपने डीएससी को सीए के पास छोड़ देतें हैं, तो उन्हें इस बारे में अवगत कराएं।) सरकारको इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने के जरूरत है|

जीएसटी कर भुगतान करते समय लोगों को डीएससी की समस्या आती है, कंप्यूटर उसे (डिटेक्ट) भांप नहीं पाता, डीएससी बिना वे प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते। अच्छा ज्ञान वाला तकनीकी व्यक्ति इस त्रुटि को हल कर सकता है| सरकार ने यह प्रक्रिया ऑनलाइन की है ताकि व्यवसायों के लिए टैक्स भरना आसान हो। लेकिन फिर भी वे आखरी दिन तक इंतजार करते हैं। प्रत्येक माह २० तारीख कर भुगतान करने की अंतिम तिथि होती है, व्यवसाय आखरी कुछ घंटों में भुगतान करने का प्रयास करते हैं। ऐसा हजारों लोग एक ही समय करते है तो कभी-कभी यह विफल हो जाता है। देर से किये कर भुगतान के दंड से बचने के लिए उन्हें अच्छी योजना की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

यद्यपि ऐसा लगता है कि जीएसटी की छवी सकारात्मक की तुलना में अधिक नकारात्मक हैं, पर हमें यह समझने की आवश्यकता है कि यह संक्रमण चरण है। जीएसटी निश्चित रूप से हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद करेगा लेकिन यह एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमे समय लगेगा। केवल समय हमें बताएगा कि क्या जीएसटी भारत के लिए फायदेमंद है या नहीं। लेकिन इस कर सुधार से पता चलता है कि भारतीय सरकार और नागरिक देश की भलाई के लिए बड़े कदम उठाने के लिए तैयार हैं। लोग एक साथ आ रहें हैं, चर्चा कर रहे हैं, राष्ट्रीय विकास पर बहस कर रहे हैं, जो अपने आप में बहोत बड़ी बात हैं।

सरकार पे ऐसे आरोप लगाए जा रहे थे की यह भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा| इसके बारेमे बहोत नकारात्मक विचार फैलाये जा रहे थे| सरकार का कहना था की जीएसटी का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव होगा पर वह एक बार फिर अपने मूल स्तर कर आएगी| २०१८ में अब वैसाही हो रहा है, भारत की जीडीपी रेट अब ७.२ हुई है, यह एक बहुत अच्छी खबर है|

Tips of Essay on GST in Hindi

  1. जीएसटी पर आपको वृतांतपर निबंध लिखना पड़ेगा, यह निबंध प्रकार इस विषय में ज्यादा सूट होगा| क्या आपको पता है निबंध के विविध प्रकार होते हैं|
  2. वृतांतपर निबंध के लिए आपको जीएसटी के बारेमे ज्यादा से ज्यादा वास्तविक जानकारी, उसका परिणाम, प्रभाव, धोका इसके बारेमे सोचना पड़ेगा|
  3. निबंध प्रमुखतः तीन सेक्शन में विभाजित होतें है, परिचय या प्रस्तावना, कोर सेक्शन और निष्कर्ष.

Tip for Speech on GST in Hindi

  1. अगर आप पहिली बार भाषण दे रहें तो, दोस्तोंके सामने इसकी प्रैक्टिस कीजिये, अगर आपके मदत के लिए कोई नहीं है तो आप आयने के सामने भी प्रैक्टिस कर सकते हैं|
  2. हमारा आपसे अनुरोध है की, हो सके तो भाषण का दिया गया विषय समझने की कोशिश कीजिये| भाषण का रट्टा मत मारिये, इससे आपको कुछ हासील नहीं होगा, आपका भाषण रोबोटिक लगेगा और इससे आप आपके ऑडियंस से कनेक्ट नहीं कर पाएंगे|

Note: If this sample essay or speech helped you in any way then kindly give us good rating, it motivate us to work harder for you guys. You can also tell, What do you think on GST’s advantages and disadvanatges.

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